तुम ही मेरे सच्चे दोस्त हो


Hindi sex stories, antarvasna मेरा नाम राजेश है मैं बिजनेसमैन हूं मेरा बिजनेस दिल्ली में है और मैं काफी वर्षों से बिजनेस कर रहा हूं मेरा काम काफी अच्छा चलता है और मेरी फैमिली भी पूरी तरीके से सेटल है मुझे किसी भी चीज की कोई कमी नहीं है मेरे पास वह सब कुछ है जो खुश रहने के लिए इंसान को चाहिए होता है। मैं अपने काम पर पूरा फोकस करता हूं ताकि मेरे काम में किसी भी प्रकार की कोई कमी ना रह जाए मुझे नए-नए एक्सपेरिमेंट करने का हमेशा से शौक रहा है इसलिए जब भी कोई बिजनेस मीटिंग या फिर बिज़नेस से संबंधित कहीं भी कोई एग्जीवेशन लगती है तो मैं वहां पर चले जाया करता हूं। एक दिन मेरे फोन पर मुझे मैसेज आया मैंने देखा कि मुंबई में कोई सेमिनार हो रहा है और वहां पर एग्जीबिशन भी लगी है मैंने भी वहां पर जाने की सोची और मैंने वहां पर अपने लिए होटल बुक कर लिया था मैं मुंबई पहुंचा तो मैं सीधे होटल में चला गया।

मैं जब होटल में गया तो वहां पर रूम बहुत ही ज्यादा गंदा था मुझे लगा था कि शायद सब कुछ ठीक होगा लेकिन वहां पर रूम इतने गंदे थे कि मैंने वहां से जाना ही उचित समझा मैंने वह होटल छोड़ दिया और दूसरी जगह चला गया वहां पर मैंने रूम ले लिया और उसके बाद मैं वहां से एग्जीवेशन में चला गया। मैं जब एग्जीबिशन में गया तो वहां पर मैंने देखा कि एग्जीबिशन काफी बड़ी थी और सब कुछ बड़े ही अच्छे से अरेंजमेंट किया हुआ था मैं सारे स्टॉल में जाता और वहां पर मैं उनसे पूछता क्योंकि मैं हमेशा ही कोई ना कोई नया बिजनेस करने के बारे में सोचता रहता था इसलिए मैं वहां पर गया हुआ था मुझे वहां पर शाम हो गई मुझे पता ही नहीं चला कि का समय बीत गया उसके बाद मैं वहां से होटल वापिस चला आया। मैं जब होटल वापस आया तो मैंने सोचा मैं अपने पुराने दोस्तों को फोन करता हूं और मैंने अपने कुछ पुराने दोस्तों को फोन किया वह लोग मुंबई में ही रहते हैं और मुंबई में ही सेटल हो चुके हैं मैंने सोचा कि जब मुंबई आया हूं तो उन लोगों से मुलाकात कर लेता हूं इसीलिए मैं उनसे मिलने के बारे में सोचने लगा।

मैंने जब अपने दोस्तों को फोन किया, मैं उन सब से एक ही जगह पर मिलना चाहता था इसलिए हम लोगों ने एक जगह फाइनल की जहां पर हम लोग चले गए हम सब दोस्त वहां पर मिले, मेरे तीन-चार दोस्त मुंबई में रहते हैं तो इस बहाने वह लोग भी आपस में मिल गए। जब हम लोग मिले तो मैंने उनसे कहा क्या तुम लोग आपस में कभी नहीं मिलते वह कहने लगे यार यहां इतनी बिजी लाइफ है कि कुछ पता ही नहीं चल पाता और एक दूसरे से मिलने का समय ही नहीं मिल पाता मैंने उनसे पूछा अब तो सब लोगों की जिंदगी पूरी तरीके से सेटल हो चुकी है तो अब भी क्या तुम आपस में मिलते नहीं हो वह कहने लगे वाकई में समय नहीं मिल पाता मैंने उन्हें कहा इससे अच्छा तो तुम दिल्ली में ही रह लेते दिल्ली में ही अपना कोई कारोबार कर लेते कम से कम हम लोग दिल्ली में रहते हुए एक दूसरे से मुलाकात तो कर लेते। दिल्ली में मेरे जितने भी दोस्त हैं हम सब आज तक मिलते हैं मेरे एक दोस्त ने कहा अब यह बात छोड़ो और तुम यह बताओ तुम क्या ऑर्डर करने वाले हो हम जिस जगह पर बैठे हुए थे वहां पर हमने खाने के लिए आर्डर किया हम लोगों ने साथ में डिनर किया काफी समय बाद मुझे अपने दोस्तों से मिलना अच्छा लगा और वहां से मेरे दोस्त ने मुझे मेरे होटल में छोड़ दिया। मैं होटल में ही बैठा हुआ था तो मुझे समय मिल गया मैंने सोचा कि कुछ पढ़ लेता हूं मुझे पढ़ने का बहुत शौक है तो मैंने अपने बैग में से एक नोबल निकाला और उसे पढ़ने लगा पढ़ते-पढ़ते ना जाने कब मेरी आंख लग गई मुझे कुछ मालूम ही नहीं पड़ा मैं सो चुका था और जब सुबह मेरी आंख खुली तो मैं फ्रेश हुआ। मैंने रिसेप्शन में फोन करते हुए ब्रेकफास्ट ऑर्डर किया मैंने नाश्ता कर लिया था मैंने जब अपनी घड़ी में समय देखा तो दस बज चुके थे मैंने सोचा आज तो सेमिनार था और मुझे वहां पर जाना है तो मैं वहां से जल्दी से सेमिनार में चला गया मैंने वह सेमिनार अटेंड किया और काफी देर तक मैं वहां बैठा रहा जब लंच हुआ तो मैं वहां से बाहर निकला खाने की सारी व्यवस्थाएं थी।

हम लोग सब खाने के लिए हॉल में पहुंचे तो वहां पर मुझे मेरा एक पुराना दोस्त मिला उसका नाम प्रदीप है प्रदीप से मेरी मुलाकात काफी सालों से नहीं हुई थी इसलिए मैं उसके चेहरे को अच्छे से पहचान नहीं पा रहा था लेकिन मुझे लगा कि शायद वह प्रदीप है इसलिए मैंने उससे बात की और उसे कहा आपका नाम प्रदीप है तो वह कहने लगा मेरा नाम प्रदीप है वह भी मुझे पहचान नहीं पाया था। जब मैंने उसे याद दिलाया तो तब उसने दिमाग पर जोर डालते हुए सोचा और कहा अरे राजेश इतने सालों बाद तुमसे मुलाकात हो रही है, उसने मुझे गले लगाया और कहा तुम यहां कैसे तो मैंने उसे बताया मैं तो मुंबई अक्ज़र आता रहता हूं और अपने दोस्तों से भी मिलता हूं। प्रदीप दरअसल मेरे स्कूल का दोस्त है और इतने सालों बाद एक दूसरे से मिलना काफी अच्छा लग रहा था मैंने उसे पूछा तुम क्या कर रहे हो तो उसने मुझे बताया मैं तो अपना बिजनेस कर रहा हूं और पिछले कुछ वर्षों से मैं यही कर रहा हूं और मेरी फैमिली भी मुंबई में ही सेटल हो चुकी है इससे पहले हम लोग पुणे में रहा करते थे। प्रदीप से मिलकर बहुत अच्छा लगा हम लोगों ने साथ में बैठकर सेमिनार अटेंड किया और जब सेमिनार खत्म हो गया तो वहां से हम लोग बाहर निकले प्रदीप मुझे कहने लगा तुम्हें मेरे घर पर आना होगा मैंने उसे कहा तुम्हारे घर पर मैं क्या करूंगा तो वह कहने लगा तुम डिनर के लिए आज रात को मेरे घर पर आओ।

उसने मुझे अपने घर का पता दे दिया और मैं उसके घर पर चला गया मैं जब प्रदीप के घर गया तो उसने मुझे अपने पत्नी और बच्चों से मिलवाया उनसे मिलकर मुझे बहुत अच्छा लगा मैं उन लोगों के लिए गिफ्ट लेकर गया हुआ था। मैं इतने सालों बाद अपने दोस्त से मिला था मुझे बहुत अच्छा लगा मैंने कभी उम्मीद नहीं की थी कि मेरी प्रदीप से मुलाकात हो पाएगी लेकिन उससे इतने सालों बाद मिलकर मुझे बहुत अच्छा लगा हम दोनों साथ में बैठे हुए थे। हम लोग ड्रिंक भी कर रहे थे वह उसके कुछ देर बाद हम लोगों ने साथ में डिनर किया वह मुझे कहने लगा यार मुझे आज भी वह दिन याद आते हैं जब हम लोग स्कूल में शरारत किया करते थे और टीचर हमे कितना मारती थी। मैंने प्रदीप से कहा वह दिन तो दोबारा लौट कर नहीं आ सकते लेकिन जब भी मैं अपने बच्चों के चेहरे पर देखता हूं तो लगता है कि वह लोग अपने जीवन को अच्छे से जी रहे है और उन्हें कोई भी तकलीफ या परेशानी ना हो। प्रदीप मुझे कहने लगा हां तुम बिल्कुल ठीक कह रहे हो मैंने भी कभी अपने बच्चों को कोई तकलीफ या परेशानी नहीं आने दे मैं आज अपने जीवन में बहुत खुश हूं और सब कुछ बहुत ही अच्छे से चल रहा है। उस दिन हम लोग साथ में काफी देर तक समय बिता पाए मैं वहां से अपने होटल चला गया मैंने प्रदीप से कहा था कि तुम मुझे मिलने के लिए होटल में ही आना मैंने उसे होटल का एड्रेस दे दिया था और वह मुझसे मिलने के लिए अगले दिन होटल में आ गया। जब प्रदीप मुझसे मिलने के लिए होटल में आया तो मैंने उसे कहा तुम तो यहां पर बड़े मजे करते होंगे यहां पर तो बहुत अच्छी लाइफ स्टाइल है।

वह कहने लगा हां यहां तो बहुत अच्छी लाइफ़स्टाइल है मैंने उसे कहा तो फिर तुम यहां पर क्या क्या मजे करते हो उसने मुझे अपनी गर्लफ्रेंड की फोटो दिखाई मैंने उसे कहा क्या यह तुम्हारी गर्लफ्रेंड है। वह कहने लगा हां यह मेरी गर्लफ्रेंड है मै इसका पूरा ध्यान रखता हूं और यह भी मेरा पूरा ख्याल रखती है मुझे तो यकीन ही नहीं हुआ वह 25 साल की कमसिन लडकी थी मेरा उसे देखकर लंड खड़ा हो गया। प्रदीप ने मुझे कहा कोई बात नहीं मैं तुम्हारी इच्छा पूरी करवा देता हूं प्रदीप ने अपनी गर्लफ्रेंड को बुला लिया मैंने उसे कहा यार तुम तो मेरे सच्चे दोस्त हो। जब वह लडकी हमारे पास आई तो उसे देखकर मेरा लंड एकदम तन कर खड़ा हो गया उसका गोरा बदन और उसकी गोरी टांगें देखकर मै अपने आप पर ज्यादा काबू ना कर सका। प्रदीप कहने लगा मैं थोड़ी देर बाद आता हूं, मैंने जब उसके कपड़े उतारे तो उसकी नेट वाली पैंटी देखकर मेरा लंड एकदम से खड़ा हो गया मैं अपने लंड को उसके मुंह में डालने लगा। वह मेरे लंड को बहुत देर तक सकिंग करने लगी और उसे बहुत मजा आने लगा वह मेरे लंड को ऐसे चूस रही थी जैसे कि कोई लॉलीपॉप चूस रही हो।

मेरे अंदर की गर्मी भी बढ़ने लगी थी मैंने जब उसकी बड़ी गांड को अपने हाथ में पकड़ा तो मेरा मन उसकी गांड मारने का होने लगा लेकिन मुझे डर था कि कहीं वह चिल्ला ना दे इसलिए मैंने उसे घोड़ी बनाकर चोदना ही ठीक समझा। मैंने अपने लंड को उसकी योनि में डाल दिया वह मेरा पूरा साथ दे रही थी मैं बड़ी तेजी से उसे धक्के देता जाता जिससे कि उसके अंदर की गर्मी और ज्यादा बढ़ जाती। उसके चूतड़ों को मैंने अपने हाथ से कसकर पकड़ा हुआ था मैंने काफी देर उसके साथ ऐसा ही किया। जब मेरा माल उसकी योनि में गिर गया तो मेरे अंदर जोश और भी ज्यादा बढ़ गया मैंने अपने लंड को उसकी गांड में डाल दिया वह बहुत चिल्लाई और कहने लगी तुमने मेरी गांड फाड़ दी है। मैंने उसे कहा इसमें ही तो तुम्हे मजा आएगा मैं उसे तेजी से धक्के दे रहा था और वह भी मेरा पूरा साथ देती जाती। मैंने उसकी गांड से खून निकाल कर रख दिया था और जिस प्रकार से मैंने उसे धक्के दिए उससे उसकी इच्छा भी पूरी हो गई कुछ ही देर बाद मेरा वीर्य पतन हुआ। वह मुझे कहने लगी तुम्हें कोई कमी तो नहीं हुई मैंने उसे कहा यार तुमने तो आज मुझे जन्नत की सैर करवा दी हम तीनों ने ड्रिंक की और उसके बाद प्रदीप ने भी उसे चोदा।

कृपया कहानी शेयर करें :