शादी की वह पहली रात


Kamukta, antarvasna मेरा नाम अमित है मैं बेंगलुरु में जॉब करता हूं मुझे बेंगलुरु में जॉब करते हुए 5 वर्ष हो चुके हैं मैं काफी समय से अपने घर भी नहीं गया था लेकिन जब मैं अपने घर चंडीगढ़ गया तो वहां पर मुझे रोहित मिला रोहित अपने घर की स्थिति मुझे बताने लगा तो मुझे बहुत बुरा लगा। रोहित मुझसे कहने लगा कि मेरे पापा की मृत्यु के बाद हम लोगों के घर में कोई भी काम करने वाला नहीं है मैं छोटी-मोटी नौकरी कर रहा हूं लेकिन उससे मेरा गुजारा नहीं चल पा रहा। रोहित पढ़ने में ठीक नहीं था इसी वजह से उसने 12वीं के बाद पढ़ाई नहीं की रोहित स्कूल में मेरे साथ पढ़ा करता था और वह ना जाने क्यों अपनी जिंदगी खराब कर बैठा और इसी वजह से आज उसे बहुत समस्याओ का सामना करना पड़ रहा है, रोहित मुझसे कहने लगा मेरे लायक भी कोई काम हो तो तुम मुझे बताना।

रोहित की स्थिति देखकर मुझे बहुत बुरा लगता है मैंने उसे कहा लेकिन तुम्हारे घर में तो सब कुछ ठीक चल रहा था वह मुझे कहने लगा जब से पापा की मृत्यु हुई है तब से हमारे घर की आर्थिक स्थिति पूरी खराब हो चुकी है मैं तो समझ ही नहीं पा रहा हूं कि मुझे क्या करना चाहिए। रोहित का घर हमारे घर से कुछ ही दूरी पर है इसलिए उसके घर पर मेरा आना जाना लगा रहता था इस बार जब मैं रोहित से मिला तो रोहित ने मुझे कहा यार तुम मेरे लिए कुछ करो मैंने उसे कहा ठीक है मैं देखता हूं। मैं घर पर 10 दिन रुकने वाला था मैंने 10 दिन के लिए अपने ऑफिस से छुट्टी ली थी और इन 10 दिनों में जब मेरी हमेशा रोहित से मुलाकात होती तो रोहित सिर्फ मुझे इसी बात के लिए कहता कि तुम मेरे लिए कुछ कर सकते हो मुझे भी लगा कि मुझे रोहित के लिए कुछ करना चाहिए। मैंने रोहित से कहा तुम क्या करना चाहते हो वह कहने लगा यार मैं तो कुछ भी काम कर लूंगा लेकिन उससे मुझे पैसे मिलने चाहिए। मैंने रोहित से कहा तुम एक काम करो मैं तुम्हारे लिए एक छोटा सा रेस्टोरेंट खोल लेता हूं यदि तुम उसे चला पाओ तो, उसके बदले तुम मुझे कुछ पैसे दे दिया करना रोहित कहने लगा हां क्यों नहीं मैं जरूर उसमें पूरी मेहनत से काम करूंगा।

मेरे घर के बाहर मेरी दुकानें खाली पड़ी थी मैंने सोचा कि वही पर क्यों ना मैं रेस्टोरेंट खोल कर रोहित को दे दूं ताकि वह काम को चला सके उससे उसका भी रोजगार चल पाएगा और मुझे भी वह कुछ पैसे दे दिया करेगा इसलिए मैंने रोहित के लिए वहां पर रेस्टोरेंट खोल दिया। वह अच्छे से काम भी करने लगा था मैं तो वापस बेंगलुरु आ गया था लेकिन रोहित मुझे हमेशा पैसे भेज दिया करता था रोहित से मेरी दस पंद्रह दिनों में बात हो जाती थी वह मुझे हमेशा कहता कि तुम्हारा मुझ पर बहुत बड़ा एहसान है। मैंने रोहित से कहा कोई बात नहीं दोस्त ऐसा तो होता ही है लेकिन रोहित मेरे एहसान को भुला नहीं पा रहा था और वह हमेशा ही मुझसे इस बारे में कहता रहता। मैं उसे कहता की यह सब तुम्हारी मेहनत है और तुम मेरे दोस्त हो यदि मैंने तुम्हारी मदत की तो इसमें एहसान की कोई बात नहीं है। मैं जब वापस चंडीगढ़ गया तो मैं रोहित के घर पर गया जिस वक्त हम लोग पढ़ा करते थे उस वक्त रोहित की बहन रीमा बहुत छोटी थी लेकिन वह अब बड़ी हो चुकी थी। गरिमा को जब मैंने देखा तो वह मुझे अच्छी लगी लेकिन मुझे यह डर था कि कहीं रोहित मेरे और गरिमा के बारे में कुछ गलत ना समझ ले इसलिए मैंने गरिमा से ज्यादा बात नहीं की। कुछ दिनों बाद गरिमा की मां ने मुझे कहा बेटा तुमने रोहित का बहुत ध्यान रखा और तुम्हारी वजह से ही आज वह अपने पैरों पर खड़ा है और अच्छे से काम कर पा रहा है। उसकी मां ने जब मुझसे यह कहा कि मैं चाहती हूं तुम गरिमा के साथ शादी कर लो और फिर तुम उसका हाथ थाम लोगे तो मुझे बहुत खुशी होगी। उसकी मां के कहने पर मैं उन्हें मना ना कर सका लेकिन मैंने उनसे कहा मैं पहले अपने घर पर इस बारे में बात करना चाहता हूं। रोहित की मां ने यह बात रोहित को भी बता दी और जब उन्होंने यह बात रोहित को बताई तो रोहित भी खुश था क्योंकि रोहित को मेरे बारे में सब कुछ पता है रोहित ने मुझे कहा यार यदि तुम्हारा रिश्ता मेरी बहन के साथ हो जाएगा तो मुझे बहुत खुशी होगी क्योंकि तुम्हारे जैसा लड़का उसे शायद ही कभी मिल पाएगा।

उसका परिवार चाहता था कि मैं गरिमा से शादी कर लूं लेकिन मैं पहले अपने घर पर इस बारे में बात करना चाहता था और उसके बाद ही मैं इस बारे में कोई फैसला लेना चाहता था। हालांकि गरिमा में ऐसी कोई कमी नहीं थी वह मुझे बहुत पसंद थी और मैं चाहता था कि उससे मेरी शादी हो और मैंने गरिमा से शादी करने के बारे में सोच लिया था। गरिमा से जब मैंने इस बारे में बात की तो मैंने उससे कहा तुम घबराओ मत और मुझे तुमसे जो पूछना है तुम मुझे उसका जवाब देना मैंने गरिमा से पूछा क्या तुम्हारा किसी और के साथ कोई अफेयर तो नहीं है या तुम किसी और को चाहती तो नहीं हो। गरिमा मुझे कहने लगी नहीं मेरी जिंदगी में कोई भी नहीं है मैंने गरिमा से पूछा क्या तुम मुझसे शादी करना चाहती हो। गरिमा मुस्कुराने लगी और वह मुझे कहने लगी हां मैं आपसे शादी करना चाहती हूं यदि आप से मेरी शादी होगी तो मेरा जीवन संवर जाएगा, भैया आपकी बहुत तारीफ करते हैं और मम्मी भी आपके बारे में बहुत कहती रहती हैं। सब कुछ बहुत अच्छे से चल रहा था गरिमा भी मुझे पसंद करने लगी थी मैंने एक दिन अपने पापा से इस बारे में बात की शायद पापा को यह रिश्ता पसंद नहीं था क्योंकि पापा चाहते थे उनके दोस्त की लड़की से मेरी शादी हो लेकिन वह मेरी बात को भी नहीं टाल सकते थे और वह मेरा रिश्ता गरिमा के साथ करने के लिए तैयार हो गए।

मैं बहुत खुश था क्योंकि मैं जहां चाहता था वहां मेरी शादी हो रही थी और इस बात से रोहित और उसकी मां भी बहुत खुश थे। मेरे मम्मी पापा जब गरिमा को देखने के लिए पहली बार गए तो उन्हें गरिमा बहुत अच्छी लगी और उसे देख कर वह बहुत खुश हुए। उन्होंने मुझे कहा पहले तो हमें लग रहा था कि शायद गरिमा तुम्हारे लायक नहीं है लेकिन जब हम लोगों ने गरिमा से बात की तो हमें बहुत अच्छा लगा वह तुम्हें खुश रखेगी और तुम्हारा बहुत ध्यान रखेंगी। सब कुछ बहुत ही अच्छे से हो चुका था और मेरी सगाई भी गरिमा से हो गई जब मेरी सगाई गरिमा से हुई तो हम दोनों बहुत खुश थे लेकिन मैं कुछ समय बाद बेंगलुरु चला गया मेरी गरिमा से फोन पर बात होती थी। मैं सोचने लगा कि मैं जब इस बार घर जाऊंगा तो गरिमा से शादी कर लूंगा लेकिन मुझे ऑफिस से छुट्टी नहीं मिल पा रही थी इसीलिए मैंने फिलहाल अपनी शादी का ख्याल अपने दिमाग से निकाल दिया था लेकिन मैंने अपने पिताजी से कहा था कि मैं जब इस बार छुट्टी लेकर आऊंगा तो आप मेरी शादी गरिमा से करवा दीजिएगा। पापा ने कहा ठीक है हम लोग इस बारे मेरी गरिमा की मां से बात कर लेंगे उन्होंने भी गरिमा की मां से बात कर ली थी। मेरी शादी के लिए उन्होंने पूरी तैयारी कर ली थी मुझे अपनी शादी के लिए छुट्टी लेनी थी और जब मैं घर आया तो मेरी शादी गरिमा के साथ हो गई। मेरी शादी गरिमा के साथ हो चुकी थी और जब गरिमा और मेरी सुहागरात की पहली रात थी तो उस दिन मैंने गरिमा से कुछ देर बात की हम एक दूसरे से बात कर के खुश थे।

मैंने गरिमा से कहा आखिरकार जो तुम चाहती थी वह हो गया गरिमा से मेरी शादी हो चुकी थी और अब वह मेरी पत्नी थी मैंने लाइट बुझा दी मैने गरिमा के होठों को किस किया गरिमा को बहुत अच्छा लग रहा था। मैंने गरिमा के स्तनों को दबाना शुरु किया तो उसे मजा आने लगा और जैसे ही मैंने गरिमा के कपड़ों को उतारा तो उसके शरीर पर एक भी बाल नहीं था मैंने गरिमा से कहा तुम्हारा बदन तो बहुत चिकना है। मैं उसके बदन को महसूस कर रहा था और मैं उसके स्तनों को दबा रहा था मैंने जब गरिमा के स्तनों को अपने मुंह में लिया तो उसे बड़ा मजा आ रहा था और मैं भी बहुत खुश था। मैंने गरिमा के निप्पलो को अपने मुंह में लेकर चुसा तो उसके अंदर की उत्तेजना बढ़ने लगी और मेरे अंदर भी जोश बढने लगा मैंने गरिमा की योनि में अपने लंड को सटाया तो उसकी योनि से खून निकलने लगा। मुझे वह देखकर और भी ज्यादा उत्तेजना जागने लगी मैंने पूरी तेजी से धक्के देने शुरू किए मैंने उसके दोनों पैरों को चौडा करते हुए उसकी योनि मे तेजी से डाला तो वह मचल रही थी वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।

मैंने जब उसे घोड़ी बनाकर धक्के देने शुरू किए तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था मैंने उसे बड़ी तेजी से धक्के दिए जिससे कि उसकी चूतडो का रंग लाल हो जाता मेरी सुहागरात की पहली रात बहुत अच्छी थी। मैंने जब अपने लंड पर तेल लगाकर गरिमा की गांड में अपने लंड को प्रवेश करवाया तो वह चिल्लाने लगी और मैं तेजी से उसे धक्के देने लगा मैं बहुत तेजी से उसे धक्के दे रहा था वह चिल्ला रही थी। वह मुझे कहने लगे मुझे बहुत दर्द हो रहा है लेकिन सुहागरात की पहली रात हम दोनों के लिए यादगार बनकर रह गई, उस रात मैंने गरिमा के साथ भरपूर मजे लिए और उसने मेरा बहुत अच्छे से साथ दिया। अगले दिन जब वह कमरे में आई तो गरिमा सुबह ही उठ चुकी थी मैं सो रहा था गरिमा मुझे कहने लगी उठ जाओ। मैंने गरिमा से कहां बस कुछ देर बाद उठ जाऊंगा गरिमा ने मुझे चाय दी तो मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और उसे अपनी तरफ खींचा। गरिमा मुझे कहने लगी मुझे बड़ा दर्द हो रहा है मैंने गरिमा से कहा कोई बात नहीं ठीक हो जाएगा उस रात भी मैंने गरिमा की गांड के मजा लिए। हम दोनों एक दूसरे को बहुत प्यार करते हैं और हमारा शादीशुदा जीवन अच्छा चल रहा है।

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