संगीता की भारी भरकम गांड


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antarvasna, kamukta

मेरा नाम अमन है। मैं इंदौर का रहने वाला हूं। मेरी बेंगलुरु में एक शॉप है मैं उसी शॉप से अपने घर का गुजर-बसर करता हूं। मेरी दुकान काफी अच्छी चलती है क्योंकि वह मार्केट के बीचो-बीच है। मुझसे जितना बन पड़ता है मैं अपने परिवार के लिए करता हूं। मैं अपने बच्चों को भी एक अच्छे स्कूल में पढ़ा रहा हूं। मैंने अपने बच्चों को भी कोई कमी नहीं की है और ना ही मैंने अपनी पत्नी को कोई कमी की है। वह भी मुझसे खुश रहती है लेकिन काफी समय से ना तो मैं अपने परिवार के साथ अच्छा समय बिता पाया था और ना ही मैं कहीं घूमने के लिए जा पाया था इसलिए मैंने अपनी पत्नी सुहानी से बात की और उससे कहा कि हम लोगों ने काफी समय से एक दूसरे के साथ अच्छा समय नहीं बिताया है। क्या हमें एक दूसरे के साथ कहीं घूमने के लिए जाना चाहिए। वह कहने लगी कि हां हम लोगों को कहीं घूमने जाना चाहिए।

मैंने अपने मम्मी पापा से भी बात की। मेरे मम्मी पापा कहने लगे हम लोग तो बूढ़े हो चुके हैं हम लोग कहां तुम्हारे साथ घूमने आएंगे। तुम लोग ही घूमने के लिए चले जाओ। मैंने उनसे कहा कि आप हमारे साथ चलेंगे तो हमें अच्छा लगेगा लेकिन उन्होंने मना कर दिया और कहने लगे अब हमारी तबीयत भी ठीक नहीं रहती हम लोग घर पर ही रह लेंगे। मैंने भी सोचा कि चलो वह लोग घर पर ही रह लेंगे। मैंने गोवा जाने का प्लान बना लिया क्योंकि मेरा दोस्त कुछ समय पहले ही गोवा हो गया था और वह वहां की बड़ी तारीफ कर रहा था। मैंने उससे पूछा कि तुम लोग कौन से होटल में रुके तो वह कहने लगा कि मैं तुम्हें उस होटल का नंबर दे देता हूं। मैंने उस होटल में फोन किया और वहां पर मैंने रूम बुक कर लिए। मेरे साथ मेरी पत्नी और मेरे दोनों बच्चे थे। मैं अपनी शादी के बाद ही कहीं घूमने के लिए निकला था। हम लोग जब ट्रेन में बैठे तो मेरे बच्चे अपने दादा दादी को बहुत याद कर रहे थे। वह दोनों सब लोगों को ट्रेन में बहुत परेशान कर रहे थे।

जब ट्रेन चल पड़ी तो हमारे आगे वाली सीट खाली थी। मैं ऊपर लेटा हुआ था। जब ट्रेन अगले स्टेशन पर रुकी तो वहां से एक फैमिली हमारे साथ बैठ गई। उनके साथ भी उनके दो छोटे बच्चे थे और वह लोग भी कहीं घूमने के लिए जा रहे थे। जब मैंने उन व्यक्ति से उनका नाम पूछा तो उनका नाम राजीव था। हमारे बीच में अब अच्छी बातचीत होने लगी थी। मैंने उनसे पूछा कि आप लोग कहां जा रहे हैं। वह कहने लगे हम लोग गोवा घूमने के लिए जा रहे हैं। मैंने उनसे कहा कि हम लोग भी गोवा जा रहे है। मेरे बच्चे राजीव के बच्चों के साथ खेल रहे थे इसलिए उनका टाइम अच्छे से निकलने लगा। राजीव की पत्नी काफी कम बात कर रही थी उनका नाम संगीता था। मैं मन में सोचने लगा कि संगीता काफी घमंडी है लेकिन ऐसा नहीं था। जब धीरे धीरे वह मुझसे बात करने लगी तो मुझे लगा कि वह काफी अच्छी है। वह स्कूल में एक टीचर भी थी। मेरी पत्नी और संगीता जी के बीच बातचीत होने लगी थी। हम लोगों को सफर का पता ही नहीं चला कब हम लोग पहुंच गए। जब हम लोग गोवा पहुंचे तो मैंने वहां से टैक्सी कर ली और टैक्सी से हम लोग हमारे होटल तक चले गए। जब हम लोग होटल में पहुंचे तो वहां के मैनेजर को जब मैंने अपना नाम बताया तो वह कहने लगे आपके दोस्त भी कुछ समय पहले यहां आए थे। मैंने उन्हें कहा कि तभी तो मैंने आपके होटल में बुकिंग की वह आपके होटल की बड़ी तारीफ कर रहे थे। वह कह रहे थे आपके होटल का स्टाफ बड़ा ही फ्रेंडली है और वह सब लोग बड़े अच्छे से व्यवहार करते हैं। मैंने जब उनसे यह बात कही तो वह भी खुश हो गए। उन्होंने उस होटल के एक कर्मचारी को बुलाते हुए कहा कि आप सर का सामान रूम तक पहुंचा दीजिए। उन्होंने हमारा सामान रूम तक पहुंचा दिया और जब मैंने रूम देखा तो रूम भी काफी बड़ा था। मैं भी खुश था क्योंकि काफी समय बाद मुझे अपने परिवार के साथ एक अच्छा समय बिताने का मौका मिल रहा था। मेरी पत्नी भी कहने लगी कि आपने यह बहुत अच्छा किया कि हम लोगों को गोवा घुमाने के लिए ले आए। मैं काफी समय से सोच रही थी कि हम लोग कहीं घूमने भी नहीं गए हैं। मैंने अपनी पत्नी को कहा तुम बच्चों को नहला दो।

मेरी पत्नी ने बच्चों को नहला दिया। उसके बाद हम लोग भी फ्रेश हो गए। हम लोग शाम के वक्त घूमने के लिए निकल पड़े। जब हम लोग घूम रहे थे तो वहां पर काफी भीड़ थी और हम लोग जब बीच पर बैठे तो मैंने देखा कि राजीव और संगीता भी उसी बीच पर बैठे हुए थे। हम लोग जब उनसे मिले तो वह कहने लगे कि गोवा में तो काफी अच्छा लग रहा है। मैंने उन्हें कहा कि आज रात को हम लोग एक साथ डिनर करते हैं। वह कहने लगे ठीक है। जब रात को हम लोगों ने साथ में डिनर किया तो हमारे बच्चे भी बहुत खुश हुए और हम लोग भी बहुत खुश हो रहे थे। जब हम लोग जाने लगे तो राजीव से मैंने उसका नंबर ले लिया। राजीव कहने लगा यदि मेरा नंबर नहीं लगता तो तुम संगीता का नंबर भी ले लो। मैंने संगीता का नंबर भी ले लिया था। उसके बाद हम लोग भी होटल में लौट आए थे।  मैंने अगले दिन संगीता को फोन किया क्योंकि राजीव का नंबर नहीं लग रहा था। संगीता कहने लगी तुम कहां पर हो? मैंने उसे कहा हम लोग तो होटल में ही हैं।

उस दिन संगीता और राजीव को झगड़ा हुआ था। वह मुझे अपने पास बुलाने लगी। जब मैं उसके पास होटल में गया तो वहां पर राजीव नहीं था। मैंने उससे पूछा राजीव कहां गया है। वह कहने लगी मुझे नहीं पता वह कहां चले गए लेकिन मुझे उनसे बात नहीं करनी। वह मेरे बगल में ही बैठी थी मैंने जब उसकी जांघ पर हाथ रखा तो वह शांत हो गई और आराम से बात करने लगी। उसका गुस्सा भी अब शांत हो चुका था। मैंने जब उसके कंधे पर हाथ रखा तो मुझे ऐसा लगा जैसे वह मुझसे सेक्स की मांग कर रही हो। मैंने जब उसके लिपस्टिक लगे होठों को अपने हाथ से छुआ तो वह पूरी उत्तेजित हो गई और उसने मुझे किस कर लिया। मुझे बिल्कुल उम्मीद नहीं थी कि संगीता के साथ में शारीरिक संबंध बना पाऊंगा। मैंने जब उसे किस किया तो वह पूरी तरीके से उत्तेजित हो गई और मेरी बाहों में आने को तैयार हो गई मैंने उसके कपड़े उतार दिए। उसने मुझे कहा तुम भी नंगे हो जाओ। मैंने भी अपने सारे कपड़े उतार दिए। मैंने जब उसकी चूत को देखा तो उसमें हल्के काले रंग के बाल थे लेकिन उसके स्तनों और उसकी गांड बड़ी भारी थी। मैंने जब उसके स्तनों को दबाया तो मुझे बहुत आनंद आने लगा। वह भी उत्तेजित हो गई मैंने उसके स्तनों का रसपान 5 मिनट तक किया। उसकी चूत से तरल पदार्थ बाहर निकलने लगा उसने मेरे लंड को अपने हाथ से हिलाते हुए अपने मुंह में कुछ देर तक चूसा। जब मैंने उसकी चूत मारी तो मुझे उसे चोदने में बड़ा मजा आया और मैं उसके साथ 5 मिनट तक संभोग कर पाया मेरा वीर्य जैसे ही उसकी योनि के अंदर गया तो हम लोग कुछ देर तक साथ में बैठे हुए थे और बातें करने लगे। जब मेरा हाथ उसकी गांड पर लगा तो मैंने उसे घोड़ी बना दिया और कहा मैं तुम्हारी गांड मारना चाहता हूं। वह कहने लगी मैंने आज तक अपनी गांड नहीं मरवाई तो तुमसे कैसे अपनी गांड मरवा सकती हूं। मैंने अपनी इच्छा जाहिर की और वह भी मना ना कर सकी। मैंने अपने लंड पर तेल लगा लिया मैंने उसकी गांड के अंदर अपने लंड को सटाते हुए अंदर की तरफ झटके देने शुरू किया। मेरा लंड जैसे ही बड़ी और भारी भरकम गांड मे गया तो वह चिल्ला उठी और कहने लगी तुम्हारा लंड तो बहुत मोटा है लेकिन उससे ज्यादा देर तक बर्दाश्त नहीं हुआ। वह कहने लगी मुझे बहुत दर्द हो रहा है। मैंने उसे कहा जानू बस कुछ देर की बात है। मैं उसे बड़ी तेज गति से धक्के दे रहा था वह मेरे पूरे बस में थी। मैंने उसकी गांड पर अपने नाखून के निशान भी मार दिए। मैं उसकी गांड बस 2 मिनट तक ही मार पाया। जब मेरा वीर्य पतन हुआ तो वह मेरे साथ काफी देर तक बैठी रही। मैंने उससे पूछा राजीव और तुम्हारे बीच में झगड़ा क्यों हुआ। वह कहने लगी मैंने उनसे कहा कि मुझे सेक्स करना है लेकिन वह सेक्स करने के लिए तैयार नहीं थे इसीलिए मैंने उनके साथ झगड़ा कर लिया।