रात को इंतजार करूगा


kamukta, antarvasna मैं अपने काम के प्रति बड़ा ही सीरियस रहता हूं लेकिन मुझे उस वक्त तकलीफों का सामना करना पड़ा जब मैं अपनी गाड़ी से अपने काम के सिलसिले में जा रहा था, मैं अपनी कार से ड्राइव कर रहा था तभी मेरे आगे एक कुत्ते का बच्चा आ गया उसको बचाने के चक्कर में मैंने बड़ी ही जोर से ब्रेक लगाया तभी आगे गाड़ी टकरा गई और मेरा एक्सीडेंट हो गया उस एक्सीडेंट में मेरा सिर और मेरे पैर पर बहुत चोट आई, वहां से कुछ लोगों ने मुझे अस्पताल में एडमिट करवा दिया मैं जब अस्पताल में एडमिट हो गया तो मेरे घर वालों को इस बारे में सूचित किया गया जब मेरे परिवार वाले वहां पर आए तो वह लोग बहुत घबराए हुए थे मैंने उन्हें कहा कि नहीं मुझे कुछ भी नहीं हुआ है आप लोग चिंता ना करें। मैंने उस वक्त उन्हें यह कहा तो वह लोग थोड़ा आश्वस्त हो गए लेकिन कहीं ना कहीं वह लोग अंदर से घबराए हुए थे मेरे पिताजी मुझसे पूछने लगे कि बेटा तुम पहले से बेहतर महसूस कर रहे हो, मैंने उन्हें कहा हां पिताजी मैं पहले से बेहतर महसूस कर रहा हूं।

मेरे सारे रिश्तेदारों को खबर लग चुकी थी और सब लोग मुझसे मिलने के लिए आने लगे, मैंने कभी सोचा ना था कि सब कुछ इतनी जल्दी में हो जाएगा लेकिन मुझे अंदर से तो बहुत ज्यादा तकलीफ हो रही थी मेरे पैर में बहुत चोट आई हुई थी इसलिए डॉक्टर ने मुझे कुछ महीने घर पर ही आराम करने के लिए कहा, मैं सोचने लगा कि मैं घर पर क्या करूंगा। जब मुझे हॉस्पिटल से डिस्चार्ज किया गया तो मैं घर पर ही था मेरे पापा मम्मी ने तो मुझे साफ तौर पर कह दिया था कि बेटा तुम्हें अब कुछ करने की जरूरत नहीं है तुम घर पर ही रहो हम लोगों के पास इतना पैसा तो है ही कि हम लोग तुम्हारी देखभाल कर सकते हैं और तुम्हें कभी कोई कमी नहीं होगी, मैंने अपने मम्मी पापा से कहा कि यह बात मुझे पता है लेकिन मुझे भी अपने बलबूते कुछ करना है, वह कहने लगे फिलहाल तुम इन झंझटो में मत पड़ो और घर पर आराम करो। वह लोग मेरी देखभाल करने लगे घर में मैं एकलौता हूं इसलिए मेरी देखभाल बड़े ही अच्छे से हो रही थी मेरे पिताजी ने तो मेरे लिए एक नौकरानी भी रखवाली, मैंने उन्हें मना किया कि मैं अपनी देखभाल खुद कर सकता हूं लेकिन वह कहने लगे कि बेटा कभी हम लोगों के घर पर ना हो तो तुम्हारी देखभाल कौन करेगा।

मैंने उन्हें कहा पिताजी आप यह सब मत कीजिए लेकिन उन्होंने मेरे लिए देखभाल करने के लिए एक महिला रख दी वह मेरी देखभाल बड़े अच्छे से किया करती लेकिन मुझे उसकी आवश्यकता नहीं थी मेरे अंदर एक बेचैनी सी थी और मेरे अंदर एक ज्वाला सी फूट रही थी क्योंकि मुझे अपना कुछ काम करना था और मैं अपना काम नहीं कर पा रहा था। एक दिन मेरे पिता और मेरी मां मेरे साथ बैठे हुए थे उस दिन मेरी बहन भी घर पर आ गई और हम सब लोग आपस में बैठकर बात करने लगे, मेरी मम्मी कहने लगी कि कुछ दिनों पहले एक परिवार हमारे घर पर आया था और वह कह रहे थे कि क्या आपके घर पर कोई रूम का सेट किराए पर मिल सकता है, मैंने मम्मी से कहा तो फिर आप लोगों ने उन्हें दिया क्यों नहीं, मम्मी कहने लगी कि बेटा मैं इस बारे में तुम्हारे पापा से बात किए बिना कैसे दे सकती हूं, मेरे पापा कहने लगे कि कोई बात नहीं तुम उन्हें दे दो वैसे भी तो हमारे घर का ऊपर का हिस्सा खाली पड़ा है और यदि उससे दो पैसे आ जाएंगे तो इसमें भला बुराई क्या है, मेरी मम्मी कहने लगी कि मैं अभी उन्हें फोन कर देती हूं। मेरी मम्मी ने उन्हें फोन किया तो वह लोग उस दिन ही हमारे घर पर आ गए मैं तो अपने रूम में ही लेटा हुआ था और शायद मम्मी लोगों ने वह सेट किराए पर दे दिया, मेरा पैर अभी पूरी तरीके से ठीक नहीं हुआ था इसलिए मैं ज्यादातर घर के अंदर ही रहता मुझे सिर्फ इतना पता था कि वह लोग किराए पर रहने के लिए आ चुके हैं लेकिन मैं उनसे कभी मिला नहीं था, मैं एक दिन उन आंटी से मिला तो मेरी मम्मी ने कहा कि यह मेरा बेटा है और कुछ समय पहले उसका एक्सीडेंट हो गया था इसलिए यह घर पर ही है, मम्मी और वह आंटी बात कर रही थी मैं अपने रूम में ही बैठा हुआ था अब मैं पहले से बेहतर महसूस कर रहा था और मैं धीरे धीरे ठीक भी होने लगा, मैंने एक दिन अपनी मम्मी से कहा कि मम्मी अब मैं पहले से ज्यादा बेहतर महसूस कर रहा हूं।

मम्मी कहने लगी कि बेटा तुम थोड़ा चल फिर लिया करो, मैंने चलने की कोशिश की तो कुछ दिनों तक तो मेरे पैर में बहुत तेज दर्द हुआ लेकिन धीरे-धीरे मैं अब चलने लगा था अब मैं ठीक होने लगा तो मैं एक दिन अपने घर की छत पर गया, मैं जब अपने घर की छत पर गया तो वहां पर मैंने एक लड़की देखी मुझे समझ नहीं आया कि वह कौन है उसने मुझे देखते हुए हेलो किया और कहने लगी मेरा नाम लता है। मुझे समझ नहीं आया कि आखिर वह है कौन, तभी मेरी मम्मी आई और कहने लगी की यब लता है फिर मुझे समझ आ गया कि यह हमारे घर पर ही रहती हैं, मुझे उसे देख कर अच्छा लगा जब भी मैं उससे बात करता हूं तो मुझे बहुत अच्छा लगता और हम दोनों के बीच दोस्ती भी होने लगी, मैंने सोचा नहीं था कि इतने कम समय में ही हम दोनों एक दूसरे के करीब आ जाएंगे, हम दोनों के बीच बहुत गहरी दोस्ती हो गई उसकी और मेरी सोच लगभग एक जैसी थी हम दोनों की उम्र लगभग बराबर की है जिस वजह से हम दोनों के विचार बहुत ज्यादा मिलते हैं।

मुझे उससे बात कर के बहुत अच्छा लगता है और मैं हमेशा उससे बात किया करता हूं उससे बात करना मेरी जैसे आदत ही हो गई थी। अब मैं पूरी तरीके से ठीक हो चुका था तो मैं और लता कभी-कभार एक साथ घूमने के लिए भी चले जाते हैं, मेरे पास फिलहाल कोई काम करने के लिए नहीं था इसलिए मैंने कोई नया काम शुरू करने की सोची लेकिन मेरे पापा मम्मी ने मुझे मना कर दिया और कहने लगे कि बेटा तुम्हें कुछ करने की जरूरत नहीं है अभी कुछ समय पहले ही तुम ठीक हुए हो और हम नहीं चाहते कि दोबारा से ऐसी कोई मुसीबत तुम पर आए लेकिन मैंने उन्हें जिद करते हुए मना लिया, मैंने एक नया स्टार्ट अप करने की सोची जिसमें मेरी मदद लता ने की, लता की समझदारी से मैं बहुत ज्यादा इंप्रेस था इसलिए हम दोनों ने मिलकर एक नया स्टार्ट शुरू किया, हम दोनों ने एक टिफिन सर्विस शुरू की इसके लिए हम लोगों ने कुछ लोगों को रखा और बड़े अच्छे से हम लोगों का काम चलने लगा, मुझे तो बिल्कुल उम्मीद नहीं थी कि इतनी जल्दी हमारा काम इतनी तेज रफ्तार से चलने लगेगा। जब इस बात का पता मेरे मम्मी और पिताजी को चला तो वह बहुत खुश हुए हालांकि वह चाहते नहीं थे लेकिन उसके बावजूद भी उन्होंने मुझे कुछ नहीं कहा और मुझे काम करने की अनुमति दे दी मैं बहुत ज्यादा खुश था लता और मैं बड़े ही मेहनत से काम करते अब मेरे पास भी काफी अच्छे पैसे जमा होने लगे थे और लता भी मेरे साथ काम में बराबर की हिस्सेदार थी तो मैं भी उसे आधे पैसे दे दिया करता, हम दोनों ही पार्टनर थे इसलिए हम दोनों ही काम का निर्णय किया करते, लता की वजह से मुझे काम में बहुत मदद मिलती। लता और मेरे रिशते को मेरी मम्मी ने भी मंजूरी दे दी थी हम दोनों खुलकर एक दूसरे के साथ रहते। एक दिन तो मैंने लता के स्तनों पर अपने हाथ को रख दिया और उसे कहा आज तुम मेरे साथ रहोगी। वह कहने लगी संकेत तुम्हारा दिमाग सही है मेरी मम्मी क्या सोचेगी वह मुझे कहने लगी मैं तुम्हारे साथ नहीं रूक सकती लेकिन मैंने उसे उस दिन मना लिया।

रात को वह मेरे साथ ही रुक गई जब सब लोग सो गए थे तो वह चुपके से नीचे मेरे रूम में आई और हम दोनों कमरे में ही थे। मैंने अपने हाथ को उसके बदन पर फेरना शुरू किया उसने छोटी सी निक्कर पहनी हुई थी जब मैंने अपने हाथ को उसकी जांघ पर रखा तो उसके अंदर गर्मी बढने लगी जब वह पूरे तरीके से गर्म हो गई तो उसने मेरे होठों का रसपान करना शुरू कर दिया। मैंने उसके स्तनों को जोर से दबाना शुरू किया उसके मुंह से आह की आवाज निकलने लगी मैंने जब उसकी गांड को अपने हाथों से दबाना शुरू किया तो वह पूरी तरीके से मेरे बस में आ चुकी थी मैंने जल्दी से उसके निक्कर को उतारते हुए उसकी चूत के अंदर लंड डाल दिया उसकी चूत के अंदर घुसी तो उसके मुंह से चिल्लाने की आवाज निकल पड़ी वह तेजी से चिल्ला रही थी मैं उसके अंदर बाहर किए जा रहा था। मैंने उसकी योनि के मजे लिए, वह मुझे कहने लगी तुम्हारा लंड बडा ही जबरदस्त है मैंने उसे कहा क्या तुमने पहले भी कोई लंड अपनी चूत में लिया है। वह कहने लगी इससे पहले मैंने अपने बॉयफ्रेंड का लंड चूत में लिया था लेकिन तुम्हारे लंड की बात ही कुछ और है।

तुम अपने मोटे लंड को चूत के अंदर बाहर कर रहे हो मुझे बड़ा अच्छा लग रहा है मैंने उसे घोड़ी बना दिया और घोडी बनाते ही उसे चोदना शुरू किया। मैंने उसे धक्के देना शुरू किया उसकी चूत के अंदर बाहर में अपने लंड को करता उसके अंदर एक अलग ही जोश पैदा होने लगा। मै उसे चोदा जाता मैं उसे इतनी तेज धक्के दे रहा था मेरे लंड का बुरा हाल हो गया था लेकिन मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था। मैं उसे काफी देर तक चोदता रहा जब मैंने अपने वीर्य को उसकी चूतड़ों पर गिराया तो वह मुझे कहने लगी अब मैं इसे कैसे साफ करूं। मैंने उसे कहा मैं तुम्हें अभी कपड़ा ला कर देता हूं मैंने उसे अपनी टी-शर्ट दी उसने उससे मेरे वीर्य को साफ किया। मैंने कुछ देर उसे अपने लंड को भी चुसवाया वह मेरे लंड को बड़े अच्छे से चूस रही थी उसने मेरे लंड को इतने अच्छे से चूसा की मैंने अपने वीर्य को उसके मुंह के अंदर ही गिरा दिया उसके मुंह मे मेरा वीर्य पूरी तरीके से भरा हुआ था।

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