प्यासी नजरों की तड़प


hindi sex story, kamukta मैं एक इंजीनियर हूं और मैं दिल्ली में रहता हूं वैसे मेरा घर लखनऊ में है लेकिन मुझे दिल्ली में काम करते हुए काफी समय हो चुका है मेरी शादी को भी 7 वर्ष हो चुके हैं। मैं अपने शादीशुदा जीवन से भी बहुत खुश हूं क्योंकि मैंने लव मैरिज की थी इसलिए मैं अपनी पत्नी आशा से बहुत प्यार करता हूं वह भी मुझे बहुत प्यार करती है हम दोनों की मुलाकात पहली बार एक मूवी के दौरान हुई थी। उस वक्त गलती से मैं आशा की सीट में बैठ गया था तो उसने मुझे बहुत भला बुरा कहा था फिर उसी दिन मैंने सोच लिया था कि इस लड़की को तो मैं अपनी पत्नी बना कर ही रहूंगा उसके बाद मैंने आशा का पीछा करना शुरू किया। उस वक्त मैं लखनऊ में ही रहता था जब आशा से मेरी बात हुई तो वह भी मेरे प्रपोजल को मना ना कर सकी और उसने झट से हां कह दिया।

कुछ समय तक हम दोनों एक दूसरे से मिलते रहे और जब यह बात मेरे माता-पिता को मालूम पड़ी तो उन्होंने मुझे कहा देखो बेटा यदि तुम ऐसे ही चोरी छुपे आशा से मिलते रहोगे तो हम लोग तुम्हारा साथ नहीं देने वाले तुम्हें उसके पापा से बात करनी ही पड़ेगी। आशा के पापा बडे ही सख्त मिजाज के हैं और मुझे उनसे बात करने में बहुत डर लग रहा था लेकिन मैंने हिम्मत करते हुए उनसे बात कर ली आशा के पापा ने मुझे साफ तौर पर मना कर दिया लेकिन मैंने तो सोच लिया था कि मुझे आशा से ही शादी करनी है। मैं किसी भी सूरत में उससे ही शादी करना चाहता था चाहे इसके लिए मुझे किसी भी हद से गुजरना पड़े मैंने इसी के चलते आशा के पापा से आशा का हाथ मांग लिया लेकिन वह हर बार मुझे मना करते रहते परंतु मैंने भी हार नहीं मानी फिर उन्होंने थक हार कर आशा का हाथ मेरे हाथों में दे दिया। जब हमारी शादी होने वाली थी तो उस समय हम दोनों ही बहुत खुश थे और मेरी खुशी का कारण सिर्फ आशा से शादी थी आशा मेरी पत्नी बन चुकी थी और मैं बहुत खुश था। उसके कुछ समय बाद मैं दिल्ली चला आया दिल्ली में मैं एक अच्छी कंपनी में नौकरी करता हूं और उसके बाद तो आज शादी को 7 साल हो चुके हैं कुछ मालूम ही नहीं पड़ा।

मेरा मेरे दोस्तों से भी ज्यादा संपर्क नहीं था लेकिन एक दिन मैं जब अपने काम से लौट रहा था तो उस दिन मुझे रास्ते में मेरा दोस्त माधव मिला जब मेरी मुलाकात माधव से हुई तो मैंने देखा माधव तो बिल्कुल वैसा ही है जैसे वह कॉलेज में था। मैंने माधव से कहा तुम तो बिल्कुल बदले ही नहीं हो तुम्हारी शक्ल सूरत बिल्कुल वैसे ही है जैसे कि पहले थी इतने वर्षों में भी माधव में कुछ भी बदलाव नहीं आया था और वह बिल्कुल वैसा ही था। मैंने माधव से पूछा तुम यहां दिल्ली में क्या कर रहे हो वह कहने लगा मैं तो अब दिल्ली में ही रहता हूं मैंने माधव से कहा क्या तुम दिल्ली में रहते हो वह कहने लगा हां मैं दिल्ली में ही रहता हूं और यहीं पर मैं नौकरी करता हूं। मैंने माधव से कहा चलो यह तो बहुत खुशी की बात है माधव ने मुझसे पूछा तुम कहां रहते हो मैंने उसे बताया मैं भी तो दिल्ली में ही रहता हूं माधव मुझे कहने लगा चलो एक कप चाय पी लेते हैं। हम दोनों साथ में एक दुकान में चाय पीने चले गए और वहीं पर एक दूसरे से बात करने लगे मुझे माधव से बात करना बहुत अच्छा लगा और वह भी मुझसे बात कर के बहुत खुश था हम दोनों अपने कॉलेज की बातें याद कर रहे थे। माधव मुझसे कहने लगा यार कॉलेज का दौर ही कुछ और था उस वक्त कितने मजे आते थे और सब कुछ कितने अच्छे से चल रहा था लेकिन जब से शादी हुई है तब से कितनी जिम्मेदारियां कंधों पर आन पड़ी है और अपने लिए तो जैसे समय ही नहीं मिल पाता। मैंने माधव से कहा यह तो जिंदगी का खेल है कि कौन कैसे अपना जीवन यापन करता है लेकिन मैं तो अपने परिवार के साथ बहुत खुश हूं माधव ने मुझसे पूछा तुमने शादी कब कि मैंने उसे बताया कि जब मैं लखनऊ में था तभी मेरी शादी हो चुकी थी और मेरी शादी को आज 7 साल हो गए हैं। मैंने माधव को बताया कि मैंने लव मैरिज की है तो वह कहने लगा अरे तुम तो बड़े छुपे रुस्तम निकले तुम तो कॉलेज में बड़े ही सीधे-साधे थे लेकिन तुमने लव मैरिज कैसे कर ली मैंने उसे कहा बस ऐसे ही एक लड़की पर दिल आ गया और अपने दिल की बात उसे कह दी।

माधव कहने लगा चलो यह तो बहुत खुशी की बात है कि तुम्हारी शादी को इतने साल हो चुके हैं मैंने माधव से कहा अभी मुझे घर जाना है क्योंकि घर में कुछ सामान लेकर जाना है तो मैं अभी निकलता हूं तुम मुझे अपना नंबर दे दो हम लोग फोन पर एक दूसरे से बात करते रहेंगे। मैंने माधव का नंबर ले लिया मैं वहां से अपने घर चला आया जब माधव से मेरी फोन पर बात हुई तो माधव मुझे कहने लगा यार तुम्हारे घर के आसपास कहीं कोई घर खाली होगा। मैंने माधव से कहा मैं अपनी पत्नी आशा से इस बारे में बात करूंगा यदि यहां पर कोई घर खाली हुआ तो मैं तुम्हें जरूर बता दूंगा माधव कहने लगा ठीक है तुम मुझे बता देना। मैंने अपनी पत्नी आशा को कहा कि यहां आस-पास कोई भी घर किराए पर खाली हो तो तुम मुझे बता देना मेरा एक दोस्त है उसे यहीं पर घर लेना है आशा कहने लगी ठीक है मैं शाम को पूछ कर आपको बता दूंगी। हम लोगों को उस जगह रहते हुए काफी समय हो चुका है इसलिए आशा को आस पड़ोस में सब लोग जानते हैं और शायद आशा ने घर के बारे में पता भी कर लिया था।

शाम को मैं जब ऑफिस से घर लौटा तो आशा मुझे कहने लगी मैं आपके लिए चाय बना देती हूं मैंने कहा चाय मत बनाओ आज ऑफिस में काफी चाय पी ली थी इसलिए तुम मुझे एक गिलास पानी का दे दो। आशा ने मुझे एक गिलास पानी दिया और उसके बाद मैंने आशा से कहा क्या तुमने यहां कोई घर देखा  वह कहने लगी हां यही पड़ोस में एक घर खाली है यदि तुम अपने दोस्त से कहो तो वह घर देख लेंगे। मैंने तुरंत माधव को फोन किया और कहा पड़ोस में घर खाली है तुम्हें देखना हो तो तुम कल आ जाओ माधव कहने लगा ठीक है मैं कल ही आ जाता हूं अगले दिन सुबह के वक्त माधव आ गया उसने घर देखा तो उसे बहुत पसंद आ गया। उसने एडवांस में आंटी को कुछ पैसे दे दिए मैंने माधव को अपनी पत्नी से पहली बार ही माधव से मिलाया था उसके अगले दिन ही माधव ने अपनी पत्नी को हमारे घर पर भेज दिया उसकी पत्नी ने भी वह घर देखा तो उसे भी बहुत पसंद आया अब वह लोग हमारे पड़ोस में ही आने वाले थे। माधव ने जिस दिन अपने घर की शिफ्टिंग की तो उस दिन मुझे भी उसकी मदद करनी पड़ी और जब माधव ने हमारे पड़ोस में घर ले लिया था तो हम लोग अक्सर मिला करते थे। एक दिन मैंने माधव से कहा तुम आज शाम को हमारे घर पर डिनर के लिए आना माधव कहने लगा ठीक है। माधव और उसकी पत्नी हमारे घर पर शाम के वक्त डिनर के लिए आए आशा ने डिनर तैयार किया हुआ था। जब वो लोग हमारे घर पर आये तो मुझे बहुत अच्छा लगा और मेरी पत्नी भी खुश थी क्योंकि आकांक्षा और आशा की बहुत अच्छी दोस्ती हो चुकी थी लेकिन माधव की पत्नी आकांक्षा की नियत मुझे कुछ ठीक नहीं लगती थी उसकी नज़रों में जो मुझे हवस दिखाई देती। उसे देखकर मुझे ऐसा लगा शायद माधव उसकी इच्छाओं को पूरा नहीं कर पा रहा है। वह मेरी तरफ अपनी नजरें गड़ा कर देखती रहती लेकिन मुझे इस बात का ख्याल आ जाता कि माधव मेरा दोस्त है इसलिए मैंने आकांक्षा की तरफ कभी उस नजर से नहीं देखा।

एक दिन उसने मेरे सब्र का बांध तोड़ दिया उस दिन जब मैं माधव से मिलने के लिए गया तो माधव घर पर ही था लेकिन माधव को जरूरी काम से कहीं जाना पड़ा। माधव ने कहा बस में कुछ देर में आता हूं माधव घर से चला गया आकांक्षा मेरे पास आई और बैठ गई। जब वह मेरे पास बैठी तो वह मुझे देख रही थी मैंने उसे कहा तुम मुझे ऐसे क्यों देख रही हो लेकिन वह मुझे बड़ी देर से घुर रही थी। जब उसने मेरे सामने अपने कपड़ों को उतारा तो मैं अपने आप पर बिल्कुल भी काबू ना कर सका और मैं अपने कंट्रोल से बाहर हो गया आखिरकार मैं भी अपने आपको कितने देर तक रोक पाता। जैसे ही आकांक्षा ने मेरे मोटे लंड को बाहर निकाल कर सकिंग करना शुरू किया तो मुझे बड़ा मजा आने लगा और उसे भी बड़ा मजा आ रहा था। वह मेरे लंड को बड़े अच्छे से सकिंग कर रही थी ऐसा उसने काफी देर तक किया जब हम दोनों पूरी तरीके से उत्तेजित हो गए तो मैंने आकांक्षा की योनि में अपने लंड को डाल दिया। उसकी योनि में मेरा लंड जाते ही मैने उसे तेजी से धक्के देना शुरू कर दिया मैं काफी तेजी से उसे धक्के दिए जा रहा था, वह मेरा पूरा साथ दे रही थी।

मैंने उसकी योनि के मजे करीब 5 मिनट तक लिए जब मेरा वीर्य पतन हो गया तो उसने मेरे लंड को कुछ देर तक अपने मुंह में लेकर सकिंग किया और दोबारा से मेरा लंड खड़ा हो गया। मैने उसकी गांड के अंदर लंड प्रवेश करवाया तो वह चिल्ला उठी और कहने लगी मुझे दर्द हो रहा है लेकिन मैं उसकी गांड के मजे काफी देर तक लेता रहा। मैंने काफी देर तक उसकी गांड के अंदर बाहर अपने लंड को किया मुझे बहुत मजा आता। मै उसे लगातार तेजी से धक्के देता जाता जैसे ही उसकी गांड के अंदर मेरा वीर्य गिरा तो मैंने उसे कसकर पकड़ लिया। वह मुझे कहने लगी तुमने तो मेरी गांड के भी मजे ले लिया मैंने उसे कहा तुम्हारी नजरे मुझे कुछ ठीक नहीं लगी थी इसलिए मैंने सोचा आज तुम्हारी सेक्स की इच्छा को पूरी तरीके से संतुष्ट कर ही दिया जाए। वह मुस्कुराकर कहने लगी हां तुमने बड़ी अच्छी तरीके से मेरी इच्छा को पूरा किया।

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