परेशानी को दूर करता हूं


Hindi sex kahani, kamukta मुझे रिटायर हुए ज्यादा समय नहीं हुआ था मेरे रिटायरमेंट को कुछ ही समय हुआ था मेरी कॉलोनी के लोगों ने मुझे मेरी कॉलोनी का सेक्रेटरी बना दिया मेरी छवि सब लोगों के सामने बहुत अच्छी है और कॉलोनी में सब लोग मुझे जानते भी हैं सब मेरी इज्जत करते हैं। मुझे रिटायरमेंट के बाद एक काम मिल चुका था और अब मैं पूरी तरीके से इस काम को करता हूं मैं हर सुबह अपने कॉलोनी के ऑफिस में चला जाता और वहां पर कोई भी समस्या हमारी कॉलोनी को लेकर होती तो उसके लिए मैं हमेशा तत्पर रहता हूं अब यह सिलसिला चलता रहा मुझे करीब दो महीने हो चुके थे। एक दिन मेरे पास कॉलोनी में रहने वाला ही एक परिवार आया वह मुझे कहने लगे सर हमारे घर के बाहर कुछ दिनों से ना जाने कहां से कुछ लोग आ जाते हैं और वह लोग हमेशा शोर शराबा करते हैं मैंने उन्हें कहा कॉलोनी में तो कैमरे लगे हुए हैं हम लोग कैमरे में देख लेते हैं परंतु जिस तरफ़ उनका घर था वहां की तरफ कैमरे नहीं थे ना जाने वह लोग कहां से आते थे, मैंने उन्हें कहा ठीक है मैं इस बारे में देखता हूं।

मैंने अपनी सोसाइटी के गार्ड से जब इस बारे में पूछा तो वह कहने लगा सर हमें इस बारे में कुछ भी नहीं पता मैंने उसको ऊंची आवाज में कहा तो फिर उनके घर के बाहर कौन लोग आ जाते हैं जो हमेशा ही ऐसा शोर शराबा करते हैं वह गार्ड मुझे कहने लगा सर आप उन लोगों के चक्कर में ना ही पड़िये तो ठीक रहेगा क्योंकि कॉलोनी में उन लोगों से कोई भी बात नहीं करता। उन व्यक्ति का नाम रमेश था और उनकी पत्नी का नाम नमिता था, मुझे समझ नहीं आया कि उस गार्ड ने ऐसा क्यों कहा लेकिन मेरे पर कॉलोनी की जिम्मेदारी थी इसलिए मुझे तो अपनी जिम्मेदारी को पूरी तरीके से निभाना था और मैं उसमें किसी भी प्रकार से कोई भी समझौता नहीं कर सकता था। जब मैंने इस बारे में पता किया तो ऐसा कुछ था ही नहीं वह लोग सिर्फ जानबूझकर मुझे परेशान करने आया करते थे मैंने उन्हें कहा कि क्यों ना आपके घर के बाहर हम कोई कैमरा लगा दे।

हम लोगों ने उनके घर के आसपास एक कैमरा लगा दिया मुझे कभी भी उस कैमरे में ऐसा कुछ नहीं दिखा कि जिससे उन्हें तकलीफ हो रही हो लेकिन वह लोग जानबूझकर यह सब कर रहे थे मुझे समझ नहीं आया की आखिरकार उन्होंने ऐसा क्यों किया लेकिन मुझे उनकी बात से बहुत बुरा लगा था। अब यह सिलसिला लगातार चल रहा था वह मुझे हमेशा ही परेशान करने के लिए आ जाया करते थे रमेश तो मुझे हमेशा ही मेरे ऑफिस में परेशान करने आया करता था और उनकी पत्नी कॉलोनी में ना चाहते हुए भी कोई ना कोई बखेड़ा खडा कर ही देती थी जिससे की कॉलोनी के लोग उन्हें बिल्कुल भी पसंद नहीं करते थे। मैंने एक दो बार उन्हें समझाने की कोशिश की लेकिन उन लोगों की आदत में कोई भी बदलाव नहीं आया और वह लोग जानबूझकर ऐसा किया करते थे जिससे कि कॉलोनी में सब लोगों को परेशानी हो मैंने भी रमेश के बारे में जानने की सोची। मैंने एक दिन अपनी कॉलोनी के गार्ड से पूछा कि रमेश आखिर करते क्या हैं तो वह कहने लगा साहब मुझे नहीं पता कि वह क्या करते हैं बस इतना मालूम है कि वह किसी कंपनी में नौकरी करते हैं और मुझे इससे ज्यादा कुछ भी नहीं पता लेकिन मैंने भी रमेश के बारे में जानने की सोच ली थी और मैं रमेश के बारे में जानना चाहता था इसके लिए मैंने रमेश के घर के पास जो कैमरा लगाया था उसमें मैं हर रोज देखा करता था। मैंने जब एक दिन देखा कि रमेश किसी व्यक्ति से बात कर रहे हैं और फिर उन दोनों के बीच में कुछ हाथापाई भी हो गई जिससे कि रमेश घर के अंदर छुप गया उस व्यक्ति का चेहरा तो मुझे साफ नहीं दिखाई दिया लेकिन मैंने अपने कॉलोनी के गार्ड से कह दिया था कि जब भी वह व्यक्ति तुम्हें दिखे तो तुम मुझे बताना मैंने  उसे उसका हुलिया बता दिया था। एक दिन मुझे मेरे कॉलोनी के गार्ड ने फोन किया और कहा साहब आप मेन गेट पर आ जाइए मैं जैसे ही कॉलोनी के मेन गेट पर गया तो मुझे गार्ड ने कहा जैसा हुलिया आपने मुझे बताया था वैसे ही एक व्यक्ति को मैंने यहां से जाते हुए देखा और शायद वह रमेश के घर ही जा रहे हैं। मैं जब रमेश के घर की तरफ गया तो वह भी मुझे वहां दिखाई दिए वह बहुत ही ज्यादा गुस्से में थे मैंने उनसे पूछा भाई साहब आप क्या कुछ काम से आए हुए हैं?

उन्होंने पहले मुझे कुछ नहीं बताया लेकिन जब मैंने उन्हें बताया कि मैं कॉलोनी का सेक्रेटरी हूं तो वह मुझे कहने लगे मैं आपको क्या बताऊं मैं रमेश से इतना ज्यादा परेशान हो चुका हूं कि रमेश ने मुझे कहीं का नहीं छोड़ा। मैंने उनसे पूछा आखिर ऐसा क्या हुआ तो वह मुझे कहने लगे रमेश ने मुझसे पैसे लिए थे और उसके बाद अब तक रमेश ने मुझे वह पैसे नहीं लौटाए हैं जब भी पैसे देने की बात आती है तो वह कोई ना कोई बहाना बना देता है जिस बात से मैं बहुत ज्यादा परेशान हो चुका हूं और अब शायद रमेश मेरे पैसे कभी मुझे नहीं लौटाने वाला। मैंने उन्हें कहा क्या तुम दोनों के बीच में कभी पैसों को लेकर कोई अनबन हुई तो वह कहने लगे मैं तो हमेशा ही रमेश के साथ पैसों को लेकर झगड़ा करता हूं लेकिन मुझे उम्मीद नहीं है कि अब मेरे पैसे मुझे वापस मिलने वाले हैं। वह इस बात से बहुत ज्यादा दुखी थे वह मुझे कहने लगे सर आप मुझे काफी सज्जन व्यक्ति दिखाई दे रहे हैं आप ही रमेश से क्यों नहीं कहते कि वह हमारे पैसे लौटा दे मैंने उन्हें कहा देखिए भाई साहब मैं किसी दूसरे के मामले में नहीं कह सकता लेकिन फिर भी आप कह रहे हैं तो मैं एक बार रमेश से बात कर लूंगा।

मैंने जब उन व्यक्ति को रमेश के बारे में बताया तो वह कहने लगे मुझे नहीं मालूम था कि रमेश इतना ज्यादा गिरा हुआ इंसान होगा जब भी मैं रमेश से मिलने उसके घर आता हूं तो वह कोई ना कोई बहाना बनाकर घर से निकल जाता है मुझे तो रमेश ना जाने कब से मिला ही नहीं है। मैंने उन्हें कहा अभी कुछ दिनों पहले जब आप रमेश से मिले थे तो क्या आप दोनों की कोई बात हुई थी तो वह कहने लगे मैं जब रमेश से मिला था तो रमेश मुझसे गाली गलौज करने लगा और उसके बाद हम दोनों के बीच धक्का-मुक्की हुई जिससे कि रमेश अपने घर के अंदर चला गया मैंने उन्हें कहा लेकिन रमेश ने आपसे किस लिए पैसे लिए थे तो वह कहने लगे रमेश ने मुझे कहा था कि मैं आपका एक कांटेक्ट पास करवा दूंगा क्योंकि रमेश ऑफिस में काम करता है उसी ऑफिस में मैंने काम के लिए अप्लाई किया हुआ था लेकिन ना तो मुझे वह काम मिला और ना ही मेरे पैसे मुझे वापस मिले इसलिए मुझे रमेश के चक्कर काटने पड़ रहे हैं लेकिन रमेश तो मुझे मिलने का नाम ही नहीं ले रहा। वह बहुत हताश हो चुके थे और उसके बाद वह वहां से चले गए। एक दिन मुझे रमेश की पत्नी नमिता दिखी मैंने नमिता से बात करने की सोची और उसे ऑफिस में बुला लिया मैंने जब नमिता को ऑफिस में बुलाया तो मैंने उसे सारी बात बताई नमिता मुझे कहने लगी सर मुझे सब पता है लेकिन मैं क्या कर सकती हूं अब रमेश मेरे पति हैं और मुझे उनकी गलतियों को नजरअंदाज करना ही पड़ता है मैं भी उनकी इस आदत से परेशान हो चुकी हूं लेकिन मेरे पास भी कोई रास्ता नहीं है। मुझे उस दिन पता चला कि नमिता भी रमेश के साथ खुश नहीं है इसलिए मैंने उससे ज्यादा बात नहीं की उसके बाद नमिता घर चली गई।

मुझे वह व्यक्ति दोबारा से मिले, मैंने उन्हें कहा कि मैंने रमेश की पत्नी से बात की थी उसे भी सब कुछ पता होता है, वह कुछ नहीं कह रही थी। वह व्यक्ति वहां से हताश होकर चले गए, मुझे इतना तो पता चल चुका था कि रमेश और नमिता के बीच में कुछ भी ठीक नहीं है। एक दिन मैंने इसी बात का फायदा उठाया, मैं नमिता से मिलने उसके घर पर चला गया रमेश कहीं बाहर गया हुआ था, नमिता घर पर ही थी। उसने मुझे कहा अरे सर आज आप घर पर ही आ गए, हम दोनों आपस में बात कर रहे थे नमिता ने मेक्सी पहनी हुई थी। उसकी गांड मुझे साफ दिखाई दे रही थी मैंने भी नमिता की दुखती रथ पर हाथ रख दिया। उसे एहसास हुआ कि रमेश उसकी खुशियों को पूरा नहीं कर पा रहा है वह मुझसे अपनी खुशियों को पूरा करने की उम्मीद कर बैठी। मैंने उसे अपने पास बैठा लिया जब मैंने उसे अपनी गोद में बैठाया तो उसकी गांड मेरे लंड से टकरा रही थी और मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था, काफी देर तक ऐसा ही चलता रहा। जब नमिता मेरे लंड को हिलाने लगी और कहने लगी आपका लंड तो इस बुढ़ापे में भी पूरी तरीके से कडक है, मुझे इसे मुंह में लेने में बहुत मजा आएगा।

उसने बहुत देर तक मेरे लंड को मुंह मे लिया, मैंने उसके बदन से सारे कपड़े उतार दिए और उसे नंगा कर दिया, मैंने जब उसकी गांड से उसकी पैंटी को उतारा तो उसकी गांड देखकर मेरा मन पूरी तरीके से उत्तेजीत हो गया। मैंने अपने लंड पर तेल लगा लिया और नमिता की योनि में अपने लंड को प्रवेश करवा दिया उसकी योनि में लंड जाते ही मुझे बड़ा मजा आ रहा था, मैं बहुत देर तक उसे ऐसे ही चोदता रहा। मुझे उसे चोदने में बहुत मजा आया उसने मेरा साथ बड़े अच्छे से दिया उसके बाद मुझे जब भी वह मिलती तो वह हमेशा मेरे साथ सेक्स करती, वह मेरा जुगाड़ बन चुकी थी। एक दिन मैंने उसकी गांड भी बड़े अच्छे से मारी जब मैने उसकी गांड मारी तो उसके मुंह से बहुत तेज चिख निकल रही थी जिससे कि मैं पूरी तरीके से उत्तेजित हो जाता। नमिता को अपनी गांड मारवाने में बहुत मजा आ रहा था यह सिलसिला भी जारी रहा, रमेश कई लोगों से पैसे ले चुका है और उसने अब तक पैसे नहीं लौटाए हैं। इस वजह से उसकी पत्नी बहुत परेशान रहती है लेकिन मैं उसकी परेशानी को दूर कर दिया करता हूं।

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