पनवाड़ी की लडकी के टाइट बदन का सुख


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antarvasna, kamukta

मेरा नाम आकाश है मैं चंडीगढ़ का रहने वाला हूं, मुझे घूमने का बड़ा शौक है इसलिए मैं हर वर्ष घूमने के लिए जाता हूं। पहले जब मैं कॉलेज में था तो मैं अपने दोस्तों के साथ जाता था लेकिन अब मैं अपने परिवार के साथ घूमने जाता हूं या फिर मुझे जब भी मौका मिलता है तो मैं अकेले ही घूमने निकल जाता हूं। मेरी मम्मी मुझे हमेशा कहती है कि तुम्हारे यह घूमने का शौक तो बड़ा ही अनोखा है, तुम अकेले ही घूमने निकल जाते हो तो क्या तुम्हें यह अच्छा लगता है, मैंने अपनी मम्मी से कहा पहले मैं अपने दोस्तों के साथ जाता था लेकिन अब मेरी उम्र बढ़ चुकी है और मेरे अंदर पहले से ज्यादा समझ आ गई है। मैं अब जब भी अकेले जाता हूं तो हमेशा ही कुछ सीख कर आता हूं और बहुत सारी चीजें अब मैं अकेले ही कर लेता हूं। मेरी मम्मी कहने लगी तुम्हारी बातें तो मेरे कुछ भी समझ में नहीं आती लेकिन अब तुम पहले जैसे नहीं रहे तुम बदल चुके हो, मैंने अपनी मम्मी से कहा इसमें बदलने की कोई भी बात नहीं है लेकिन अब मुझे अकेला रहना ही ज्यादा अच्छा लगता है।

एक दो वर्षों से मेरे अंदर बहुत ज्यादा बदलाव आने लगे,  मैं अब अपने दोस्तों के साथ बहुत कम रहता हूं। मैंने कुछ दिनों के लिए अपने काम से छुट्टी ले ली और सोचने लगा कि इस बार कहीं घूम आता हूं, मैंने पूरा निर्णय कर लिया था और जब मैं घर से निकलने वाला था तो उस वक्त मेरे पापा की तबीयत खराब हो गई। मेरी मम्मी कहने लगी कि तुम अपना घूमने का प्लान कैंसिल कर दो, मैंने उन्हें कहा ठीक है मैं कुछ दिनों बाद निकल जाऊंगा। मैं उस वक्त घर पर ही अपने पिताजी की देखभाल करने लगा क्योंकि मेरे भैया विदेश में रहते हैं इसलिए घर की सारी जिम्मेदारी मुझ पर ही है, मैं अपने पिताजी को कुछ दिनों तक अपने घर के पास ही किसी डॉक्टर के पास ले गया, जब मेरे पिताजी की तबीयत थोड़ा ठीक होने लगी तो मैंने अपनी मम्मी से कहा कि मैं अब घूमने के लिए जा रहा हूं, मेरी मम्मी मुझे कहने लगी तुम घूमने के लिए कहां जा रहे हो, मैंने उन्हें कहा कि मैं मध्य प्रदेश जा रहा हूं, वह कहने लगी ठीक है तुम अपना ध्यान रखना।

मैंने अपनी सारी व्यवस्थाएं कर ली थी और जब मैं मध्य प्रदेश पहुंचा तो मैं कुछ दिन वहीं रुकने वाला था, मैंने जहां पर होटल लिया था वहीं पास में एक व्यक्ति पान का खोखा लगाते थे, मैं जब वहां पर खड़ा था तो मैंने उनसे सिगरेट मांगी, उन्होंने मुझे सिगरेट देते हुए कहा कि आप कहीं बाहर के लग रहे हैं, मैंने उन्हें कहा हां मैं कुछ दिनों के लिए यहां घूमने के लिए आया हूं। मैंने उनसे उनका नाम पूछा उनका नाम लल्लन था। मैंने उन्हें अपने बारे में पूरी जानकारी दी तो वह कहने लगे कि आप तो बड़े ही घुमक्कड़ किस्म के व्यक्ति लगते हैं। वह बडे ही रोचक बातें कर रहे थे, मैं उनके साथ काफी देर तक वहीं खड़ा था, उसके बाद मैं अपने होटल में चला गया। जब मैं होटल में गया तो मैंने अपनी मम्मी को फोन किया, मेरी मम्मी मुझे कहने लगी तुम कब वापस आ रहे हो, मैंने उन्हें कहा कि अभी तो मैं निकला ही हूं, अभी मुझे थोड़ा टाइम लग जाएगा। मैंने अपनी मम्मी से कहा पापा की कैसी तबीयत है, मेरी मम्मी कहने लगी अब तो वह ठीक हो चुके हैं और अपने ऑफिस भी जाने लगे हैं, मैंने अपनी मम्मी से कहा कि आप पापा को फोन दीजिए मुझे पापा से बात करनी है, मेरी मम्मी ने मेरे पापा को फोन दिया, वह मुझे कहने लगे अब मेरी तबीयत पहले से अच्छी है तुम चिंता मत करो। मैंने अपने पापा को कहा कि आप कुछ दिन अपने ऑफिस से छुट्टी ले लीजिए, वह कहने लगे कि अब मैं पहले से बेहतर महसूस कर रहा हूं, तुम चिंता मत करो, यह कहते हुए उन्होंने फोन रख दिया। मेरे पापा बहुत ही सज्जन व्यक्ति हैं और वह बड़े ही शालीनता से बात करते हैं, वह बैंक में मैनेजर हैं। मैं उन व्यक्ति के पास दोबारा चला गया, मैंने उनसे पीने के लिए सिगरेट मांगी तो उन्होंने मुझे सिगरेट दी और लाइटर दिया, जब मैंने वह सिगरेट जलाई तो एक व्यक्ति वहां पर आकर खड़े हो गये, वह कहने लगे और ललन भैया कैसे हो, ललन भैया उनसे अंग्रेजी में बात करने लगे, वह ऐसे अंग्रेजी बोल रहे थे कि मैं तो उन्हें देखता ही रह गया। मैंने जब उन्हें पूछा कि आपने यह अंग्रेजी कहां से सीखी तो वह कहने लगे कि मैं मैच देखने का बड़ा शौकीन हूं, मैं अधिकतर इंग्लिश में ही कॉमेंट्री सुनता था इसीलिए मैं अंग्रेजी सीख गया।

मैंने उनसे पूछा कि क्या आप पढ़े लिखे हैं, वह कहने लगे मैं सिर्फ आठवीं पास हूं, मैंने उन्हें कहा लेकिन आप तो बड़ी ही अच्छी अंग्रेजी बोल लेते हैं। मैं उनके इस हुनर से बहुत प्रभावित हुआ और उनके बारे में जानने के लिए बहुत उत्सुक होने लगा, मैंने लल्लन भैया से कहा मेरे अंदर आप को लेकर बहुत उत्सुकता बढ़ने लगी है और मैं आपके बारे में जानना चाहता हूं। उनके साथ मेरा अच्छा संबंध होने लगा था इसलिए वह भी मेरे साथ अच्छे तरीके से बात करने लगे, वह मुझे कहने लगे कभी तुम हमारे घर पर हमें अपनी सेवा का अवसर दो, मैंने उन्हें कहा बिल्कुल, मैं आपके घर पर आऊंगा। मैंने उनसे नंबर ले लिया और अगले दिन ही मैंने उन्हें फोन किया, वह कहने लगे तुम शाम को मेरे घर पर आ जाना। मैं अगले दिन उनके घर पर चला गया और उनके साथ ही मैं काफी देर तक बैठा हुआ था, उनकी बातें सुनकर मुझे बहुत अच्छा लग रहा था और उनके परिवार में भी सब लोग बहुत अच्छे थे, लेकिन लल्लन भैया की लड़की बड़ी ही माल थी उसका नाम मीना था, मीना बहुत ही टाइट माल थी।

वह मुझे बड़े ध्यान से देख रही थी मुझे ऐसा लग रहा था जैसे वह मुझ पर लाइन मार रही है मैंने भी जाते वक्त उसका नंबर ले लिया। उसने एक कागज के टुकड़े में मुझे अपना नंबर लिख कर दिया मैंने रात को उसे होटल पहुंचते ही फोन किया, उस रात हम दोनों के बीच बड़ी अश्लील बातें हुई। वह मुझे कहने लगी कि मुझे आपसे मिलना है, मैंने उसे कहा तुम्हारे पिताजी की दुकान मेरे होटल के सामने ही है। वह कहने लगी कोई बात नहीं मैं अपना मुंह छुपाते हुए तुमसे मिलने आ जाऊंगी। वह मुझसे मिलने के लिए अगले दिन आ गई उसने अपना मुंह पूरा ढका हुआ था। वह जब कमरे में आई तो मैं उसे देखकर बिल्कुल भी नहीं रह पाया, मैंने उसे अपनी बाहों में ले लिया जब उसके स्तन मेंरी छाती से टकराते तो मेरे अंदर की उत्तेजना बढ़ने लग जाती। मैंने भी अपने होठों को उसके होठों से मिलाना शुरू किया और काफी देर तक हम दोनों एक दूसरे से होठों को चूसते रहे। मेरे अंदर से गर्मी बाहर आने लगी मैंने मीना से कहा तुम मेरे लंड को चूस कर उसका स्वाद ले लो। उसने मेरे लंड को चुसना शुरू किया और बड़े अच्छे से वह मेरे लंड को चूस रही थी काफी देर तक उसने मेरे लंड का रसपान किया। मैंने उसे नंगा किया तो उसने हरे रंग की पैंटी पहनी हुई थी जिसमें कि वह बड़ी माल लग रही थी मैंने उसकी चूत को चाटना शुरु किया उसकी चूत में हल्के भूरे रंग के बाल थे वह पूरी उत्तेजित हो गई थी। वह खुद ही बिस्तर में लेट गई और उसने अपने दोनों पैरो को खोल लिया मैंने कुछ देर तक तो उसकी योनि का रसपान किया, जब उसकी योनि ने पानी छोड़ दिया तो मैंने जैसे ही अपने लंड को उसकी योनि पर सटाया तो उसकी योनि बहुत ज्यादा गर्म हो रखी थी। वह मुझे कहने लगी जानू अब मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा तुम मेरी चूत में लंड डालो। मैंने भी धक्का देते हुए उसकी चूत के अंदर अपने लंड को डाल दिया, जैसे ही मेरा 9 इंच मोटा लंड उसकी योनि के अंदर घुसा तो वह  चिल्ला रही थी और मुझे कहने लगी तुमने तो मुझे मजा दिलवा दिया। मैं उसे बड़ी तेजी से धक्के मार रहा था मेरा लंड उसकी योनि के अंदर बाहर होता जाता। उसने भी अपने दोनों पैर इतने चौडे किए की मेरा लंड जब उसकी योनि की दीवार से टकराता तो वह अपने मुंह से मादक आवाज मै सिसकिया निकालती जिससे कि मेरे अंदर की सेक्स पावर और भी ज्यादा बढ़ने लगती, मैं उसे बड़ी तेज गति से धक्के देने लगता। मैंने उसे इतनी तेजी से झटक दिए जब मेरा वीर्य उसकी योनि के अंदर गया तो वह मुझे कहने लगी तुम्हारा वीर्य तो बहुत गरमा गरम है।