पडोस की लडकी की चुप्पी तोड़ दी


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मेरा नाम सुनील है मैं दिल्ली का रहने वाला हूं, मेरी उम्र 25 वर्ष है, मेरे कॉलेज की पढ़ाई को पूरे हुए एक वर्ष हो चुका है और इस बीच में मैंने एक कॉल सेंटर में भी नौकरी की लेकिन मैं वहां ज्यादा समय तक नौकरी नहीं कर पाया, उसके बाद से मैं घर पर ही हूं। मेरे पापा मम्मी मुझे हमेशा कहते हैं कि बेटा तुम कुछ कर लो, मैंने उन्हें कहा कि मैंने इंटरव्यू दिए हैं यदि किसी ऐसी जगह से मुझे कॉल आती है तो मैं वहां पर चले जाऊंगा आप लोग निश्चिंत रहिए इसीलिए वह लोग मुझे कुछ नहीं कहते क्योंकि मेरा नेचर बहुत ही साफ और अच्छा है। मेरे पापा मम्मी मुझसे बहुत प्यार करते हैं, वह मेरी हर बात को समझते हैं, मेरी दीदी की शादी को हुए 5 वर्ष हो चुके हैं। मेरे पापा सरकारी दफ्तर में क्लर्क है और वह काफी समय से वहां पर नौकरी कर रहे हैं।

एक बार मैं अपने पापा के दफ्तर में गया था, वहां पर उनके एक सीनियर है वह मुझसे पूछने लगे बेटा तुम क्या कर रहे हो, उनका लड़का किसी अच्छी जॉब में सिलेक्ट हुआ था इसीलिए वह मेरे पापा को जानबूझकर नीचा दिखाने की कोशिश कर रहे थे, मुझे उस दिन बहुत बुरा लगा, उसके बाद से मैं कभी भी अपने पिताजी के ऑफिस में नहीं गया, मैं ज्यादातर समय अपने घर पर ही बिताता था। मेरा फ्रेंड सर्कल भी इतना ज्यादा बड़ा नहीं है, मेरे कुछ ही चुनिंदा दोस्त हैं जो कि मेरे कॉलेज के समय से साथ में है, मैं कभी उन्हें फोन कर देता हूं या महीनों में कभी उनके पास चला जाता हूं। हमारे घर के पास में ही एक लड़की रहती है उसकी शादी को हुए 6 महीने ही हुए हैं लेकिन मैं उसे हमेशा ही उसके घर पर ही देखता हूं, वह अपने ससुराल नहीं रहती। एक दिन मैंने अपनी मम्मी से पूछा कि जो हमारे पास के ललित अंकल हैं उनकी लड़की रागिनी की शादी तो हो चुकी है लेकिन वह अपने मायके में ही क्यों रहती है, मेरी मम्मी कहने लगी उस बेचारी का तो पूछो ही मत उसके साथ तो बहुत बुरा हुआ, मैंने अपनी मम्मी से पूछा उसके साथ ऐसा क्या हुआ, मम्मी कहने लगी कि उसका पति किसी और के साथ प्रेम करता था और वह पहले से ही शादीशुदा था, जब यह बात रागिनी को पता चली तो उसे बहुत ही सदमा पहुंचा और उसके बाद से वह घर पर ही है। मैंने अपनी मम्मी से कहा कि क्या उन लोगों ने उस लड़के के ऊपर कोई केस नहीं किया, मेरी मम्मी कहने लगी बेटा आजकल कौन इन चक्करो में पड़ता है सीधे तरीके से ही यदि जिसका निस्तारण हो जाए तो ही अच्छा है, पुलिस के चक्कर में तो कोई नहीं पड़ता और फिर कोर्ट कचहरी के चक्कर मारते मारते तो आदमी की चप्पल भी घिस जाते हैं।

मैंने अपनी मम्मी से कहा आप यह बात तो सही कह रही हैं, मेरी मम्मी कहने लगी और ऊपर से उनके रिश्तेदार भी अब उन्हें काफी भला बुरा कहते हैं इसीलिए रागिनी घर पर ही रहती है। मेरी इतनी ज्यादा बात रागिनी से कभी नहीं हुई थी इसलिए मैं उसके बारे में ज्यादा नहीं जानता था। एक दिन मैंने अपनी मम्मी से कहा कि मैं रागिनी से बात करना चाहता हूं क्या आप रागिनी की मम्मी को जानती हैं, मेरी मम्मी कहने लगी हां उसकी मम्मी से मेरी अच्छी बातचीत है। मैं अपनी मम्मी के साथ रागिनी के घर चला गया, जब मैं रागिनी के घर गया तो उसकी मम्मी हमारे साथ बैठी हुई थी लेकिन उसकी मम्मी बहुत ही उदास लग रही थी, वह मुझे कहने लगी बेटा अब तुम्हें क्या बताएं रागिनी के ऊपर जैसे दुखों का पहाड़ टूट पड़ा हो और वह काफी उदास रहती है। मैंने आंटी से कहा यदि आप मुझे इजाजत दे तो मैं रागिनी के साथ बात करना चाहता हूं, आंटी ने मुझे कहा तुम रूम में चले जाओ वह रूम में ही बैठी हुई होगी। मैं जब रूम में गया तो रागनी चुपचाप बैठी हुई थी और उसने मुझे देखते हुए इग्नौर सा कर दिया, मैंने रागिनी को अपना परिचय दिया लेकिन रागिनी ने मुझसे ज्यादा बात नहीं की, मैंने उसे अपना नंबर दे दिया और मैंने उसे कहा कि यदि तुम्हें लगे कि तुम्हें मुझे फोन करना चाहिए तो तुम मुझे फोन कर देना, मैंने उससे ज्यादा बात नहीं की उसके बाद मैं अपनी मम्मी और आंटी के साथ बैठ गया। आंटी कहने लगी बेटा यदि जो तुम रागिनी के जीवन में थोड़ा खुशियां भर दो तो हमें भी अच्छा लगेगा, वह बहुत ही दुखी हो चुकी है, मैंने आंटी से कहा आप चिंता मत कीजिए मुझसे जितना बन पड़ेगा मैं उतना रागिनी के लिए जरूर करूंगा।

हम लोग काफी देर तक आंटी के साथ बैठे हुए थे, जब मैं और मेरी मम्मी घर आ रहे थे तो मेरी मम्मी कहने लगी रागिनी बहुत अच्छी लड़की है और उसके फैमिली वाले भी बहुत अच्छे हैं। मैं रागिनी के फोन का इंतजार कर रहा था लेकिन उसका फोन मुझे कई दिनों तक नहीं आया, एक दिन मुझे एक अनजान नंबर से कॉल आई, मैंने फोन रिसीव किया तो कुछ देर तक तो सामने से किसी ने भी कुछ नहीं बोला, मैं सिर्फ हेलो हेलो करता रहा, जब मैं फोन काटने वाला था तो उसी वक्त सामने से एक सुरीली आवाज आई और उसने मुझे कहा की मैं रागिनी बोल रही हूं। मैंने रागिनी से कहा हां रागिनी बोलो, मैं उससे बात करने लगा था और वह भी मुझसे अच्छी तरीके से बात कर रही थी, उसने मुझे बताया कि वह काफी परेशान है, मैंने उसे कहा तुम मुझे एक दिन कभी फुर्सत में मिलना हम लोग आराम से बात करेंगे। मैं रागिनी से अब फोन पर बात करता था और उसे मेरी मैसेजेस में भी बात हो जाती थी लेकिन हम दोनों ज्यादा बात नहीं करते थे,  वह थोड़ा बहुत मुझसे बात करने लगी थी।

एक दिन मैंने रागिनी को फोन किया उस दिन घर पर कोई भी नहीं था, मैंने रागिनी से कहा यदि तुम घर पर आ सकती हो तो तुम आ जाओ। उस दिन मेरी किस्मत अच्छी थी, रागिनी घर पर आ गई वह जब घर पर आई तो मैंने उसे बात की और उसकी परेशानी का कारण पूछा। वह मुझे कहने लगी मैं अंदर से बहुत टूट चुकी हूं, मुझे बहुत अकेला महसूस होता है मैंने उसकी जांघ पर हाथ रखते हुए उसे सांत्वना दी और कहा कि तुम अपने आप को अकेला मत समझा करो मैं तुम्हारे साथ हूं। मेरे इतने से कहने पर वह जैसे मुझ पर फिदा हो गई और मुझसे बात करने लगी। रागिनी और मेरे बीच इतनी खुलकर बातें होने लगी कि मैंने भी नहीं सोचा था कि हम दोनों के बीच इतनी अच्छी तरीके से बातें हो जाएंगे। रागिनी ने जैसे मुझे अपना एक अच्छा हमदर्द समझ लिया था। मैंने उसकी जांघ पर अपने हाथों को फेरना शुरू किया और उसे अपने बस में कर लिया। वह मेरे साथ सेक्स करने के लिए तैयार हो चुकी थी, मैंने जैसे ही उसके स्तनों पर अपने हाथों को लगाया तो वह पूरी तरीके से मूड में आ गई। मैंने काफी देर तक तो उसके स्तनों का रसपान किया जब मैं उसके स्तनों का रसपान कर रहा था तो वह भी पूरे मूड में होने लगी। जैसे ही मैंने उसके कपड़े खोले तो उसका बदन देख कर मैं बहुत खुश हो गया क्योंकि उसके गोरे बदन ने मुझे अपनी तरफ खींच लिया था। मैंने जब उसके स्तनों का रसपान किया तो मुझे बड़ा आनंद आ रहा था, मैं उसके स्तनो को अपने मुंह में लेकर चूस रहा था, उसके निप्पल बडे ही मुलायम और कोमल से थे। मैंने जब रागिनी की चूत पर अपने जीभ को लगाया तो वह और भी ज्यादा उत्तेजित हो गई उसकी चूत ने इतना ज्यादा पानी छोड़ा की मुझसे भी ज्यादा देर तक कंट्रोल नहीं हुआ लेकिन वह मुझसे शर्मा रही थी, परंतु मैंने भी अपने लंड को रागिनी की योनि पर लगाया तो वह उत्तेजित हो गई। मैंने जैसे ही उसकी योनि के अंदर अपने लंड को घुसाया तो मेरा लंड उसकी योनि के अंदर प्रवेश हुआ तो वह चिल्लाने लगी मैं उसे धक्के मारता रहा उसकी योनि से तरल पदार्थ निकालने लगा, उसकी चूत इतनी ज्यादा चिकनी हो चुकी थी की उसके अंदर मेरा लंड आसानी से जाने लगा था। उसने अपने पैर खोल दिए वह मुझे कहने लगी सुनील मुझे तुम्हारा लंड अपनी चूत के अंदर लेकर मजा आ गया, मैंने उसकी दोनों जांघों को कसकर पकड़ लिया मैं इतनी तेजी से झटके दे रहा था। मैं उसके साथ 5 मिनट तक संभोग कर पाया मेरा गरमा गरम वीर्य उसकी योनि के अंदर प्रवेश हुआ तो जैसे उसकी सारी टेंशन दूर हो गई हो। उसके बाद हम दोनों के बीच खुलकर बातें होने लगी वह मेरे बिना एक पल भी नहीं रह सकती और मुझे कहती मुझे तुम्हारे साथ ही अपना जीवन बिताना है।