मुझे प्रमोशन चाहिए


kamukta, antarvasna मुझे वैसे तो कम ही समय मिल पाता है लेकिन एक दिन मैं घर पर था मेरी पत्नी मुझे कहने लगी सुरजीत क्या आज आप फ्री है मैंने सुरभि से कहा हां कहो तुम्हें क्या कोई काम था? वह कहने लगी नहीं मुझे कुछ काम तो नहीं था लेकिन ऐसे तुम फ्री हो तो क्या आज हम लोग साथ में शॉपिंग करने के लिए चल सकते हैं, मैंने उसे कहा हां क्यों नहीं आज वैसे भी मैं घर पर ही हूं मैं सोच रहा था कि आज घर पर ही रहूं। मैंने सुरभि से कहा तुम तैयार हो जाओ सुरभि मुझे कहने लगी की बस तुम मुझे कुछ देर का समय दो मैं तैयार हो जाती हूं।

मैं तो तैयार हो चुका था लेकिन सुरभि तैयार ही नहीं हुई थी मैंने सुरभि से कहा तुम इतना समय लगाती हो वह मुझे कहने लगी बस 5 मिनट और दो मैं तैयार हो जाती हूं लेकिन फिर भी वह तैयारी नहीं हुई काफी देर बाद जब सुरभि तैयार हो गई तो हम दोनो वहां से मॉल में चले गए काफी समय बाद मैं सुरभि के साथ कहीं घूमने के लिए गया था क्योंकि मैं अपने ऑफिस के सिलसिले में बिजी रहता हूं इसलिए ज्यादा समय मैं सुरभि को नहीं दे पाता सुरभि तो घर पर ही रहती है इसलिए मैं सुरभि के साथ ज्यादा समय नहीं बिता पाता था लेकिन उस दिन जब हम दोनों साथ में शॉपिंग करने गए तो मुझे भी बहुत अच्छा लगा सुरभि के चेहरे पर मैं खुशी थी और वह मुझे कहने लगी सुरजीत आपके साथ कितने समय बाद मैं घूमने के लिए आई हूं। सुरभि मुझे कहने लगी जब हम दोनों कॉलेज में साथ में पढ़ा करते थे तो तुम मुझे कितना परेशान किया करते थे लेकिन मैं तुम्हें बिल्कुल भी पसंद नहीं करती थी मैंने सुरभि से कहा हां उस वक्त शायद मेरे दिल में भी तुम्हारे लिए कुछ नहीं था परंतु जैसे जैसे समय बीतता गया वैसे मुझे एहसास हुआ कि तुम दिल की बहुत अच्छी हो सुरभि मुझे कहने लगी जिस दिन पापा ने मुझे बताया कि तुम्हारा रिश्ता मेरे लिए आया है तो मैं उस दिन बहुत ज्यादा खुश हो गई थी क्योंकि मुझे नहीं पता था कि तुम से मेरी शादी हो पाएगी या नहीं।

हम दोनों ने साथ में शॉपिंग की और अपनी कुछ पुरानी यादों को ताजा किया सुरभि और मैं जब शॉपिंग कर कर के वहां से कार पार्किंग की तरफ निकले तो मैंने देखा हमारे ऑफिस के एंप्लॉय जिसका नाम कविता है वह भी किसी लड़के के साथ में वहां आई हुई है कविता वही मुझे देखते ही घबरा गई, मैंने कविता से बात की कविता मुझे कहने लगी सर मैंने आज ऑफिस से छुट्टी ले ली थी कविता ने मुझे उस लड़के से मिलाया और कहा सर यह मेरा फ्रेंड है। मैं तो समझ चुका था कि उन दोनों के बीच में क्या रिश्ता है लेकिन शायद वह वह डरी हुई थी इसलिए वह मुझसे उस लड़के के बारे में बात नहीं करना चाहती थी मैंने कविता से कहा ठीक है कविता मैं तुम्हें कल ऑफिस में मिलता हूं वह बहुत डर गई और मैं भी फिर सुरभि के साथ घर पर आ गया मैं जब सुरभि के साथ आया तो सुरभि मुझे कहने लगी आज आप फ्री हैं तो हम लोग मम्मी से मिल आते हैं मुझे मम्मी से मिले हुए काफी टाइम हो चुका है, मैंने भी सोचा चलो सुरभि कह रही है तो आज उसकी मम्मी से भी मिल लेते हैं। हम लोग उस दिन शाम के वक्त सुरभि के मम्मी के पास चले गए सुरभि की मम्मी घर पर ही थी और सुरभि के पापा शायद कहीं गए हुए थे सुरभि की मम्मी का नेचर बहुत ही अच्छा है और वह बहुत ही शांत स्वभाव की हैं वह मुझे हमेशा ही समझाती रहती हैं और मुझे उनके साथ में बात करना अच्छा लगता है उनका नेचर बड़ा ही अच्छा है और वह बहुत अच्छी है, वह मुझसे पूछने लगी बेटा तुम्हारा काम कैसा चल रहा है मैंने उन्हें कहा काम तो बहुत अच्छा चल रहा है आज मुझे काफी समय बाद घर रुकने का समय मिला इसलिए सुरभि और मैं आज शॉपिंग करने के लिए काफी समय बाद एक साथ चले गए। जब सुरभि ने मुझे कहा कि हमें आपसे मिलने के लिए आना है तो मैंने सोचा चलो फिर चल लेते है, वह मुझे कहने लगे तुमने बहुत अच्छा किया जो तुम मुझसे मिलने के लिए आ गए मैं भी काफी दिनों से तुम लोगों को याद कर रही थी और सोच रही थी कि तुम से मिलूंगी लेकिन तुमने बहुत अच्छा किया जो तुम खुद ही मुझसे मिलने के लिए चले आए। हम लोग वहां पर ठीक 4 घंटे रुके और उसके बाद हम लोग घर वापस लौट आए मैं बहुत ज्यादा थक चुका था क्योंकि इतना ज्यादा मैं कभी ट्रैवल नहीं किया करता लेकिन उस दिन मैंने कुछ ज्यादा ही ट्रेबल कर लिया था और पैदल भी काफी चल चुका था इसलिए मुझे बहुत गहरी नींद आ गई।

सुबह जब मैं उठा तो मैं उस दिन ऑफिस चला गया मैं जब ऑफिस में गया तो सब लोग बहुत ही डरे हुए थे क्योंकि मैं ऑफिस का बॉस हूं इसलिए सब लोग मुझे देखकर घबराते हैं और जब मुझे कविता ने देखा तो कविता तो उस दिन कुछ ज्यादा ही डरी हुई थी मैंने कविता को अपने केबिन में बुला लिया कविता जब मेरे केबिन में आई तो वह बहुत डरी हुई थी मैंने कविता से पूछा तुम इतना क्यों डर रही हो तो कविता ने कोई जवाब नहीं दिया और मुझे कहने लगी नहीं सर मैं कहां डर रही हूं लेकिन कविता उस दिन वाकई में बहुत डरी हुई थी। मैंने उससे पूछा तुम इतना क्यों घबरा रही हो तो वह मुझे कहने लगी सर कल की बात से मैं बहुत डरी हुई हूं मैंने कविता से कहा तुमने ऑफिस से छुट्टी ली थी और तुम ऑफिस में बहुत अच्छा काम करती हो मुझे तुम्हारी पर्सनल लाइफ से कोई लेना देना नहीं है मुझे तो सिर्फ अपना ऑफिस के काम से मतलब है तुम बाहर किस से मिलती हो और किसके साथ जाती हो उससे मुझे कोई लेना देना नहीं है, वहां थोड़ा कंफर्टेबल हो गई और मुझसे बात करने लगी उसके बाद वह अपना काम करने लगी, मैंने भी ऑफिस में अपने छूटे हुए काम को किया और उसके बाद मुझे किसी मीटिंग में जाना था मैं वहां से अपनी मीटिंग में निकल पड़ा मैं जिस मीटिंग में गया हुआ था वहां पर से मुझे लौटने में काफी वक्त लग गया इसलिए मैं ज्यादा देर तक ऑफिस में भी नहीं रुक पाया।

मैंने कभी भी अपने ऑफिस के एंप्लॉय को कोई दिक्कत या शिकायत का मौका नहीं दिया मैं उनका पूरी तरीके से ध्यान रखता हूं और हमेशा ही उनको मैं मोटिवेट करता रहता हूं। मैं जब शाम को घर लौटा तो मेरी पत्नी सुरभि कहने लगी आज आपका जन्मदिन है और ना ही मुझे याद था और ना ही आपको याद है मैंने सुरभि से कहा अरे यार काम से फुर्सत ही नहीं मिल पाती इसलिए शायद अपना जन्मदिन भी याद नहीं है और वैसे भी अब इन सब चीजों का कोई फायदा नहीं है हम लोग पहले से मेरा बर्थडे बहुत अच्छे से सेलिब्रेट किया करते थे लेकिन अब शायद ना तो मेरे पास समय होता है और सुरभि भी घर के कामों में व्यस्त रहती है इसलिए उसके पास भी ज्यादा समय नहीं हो पाता। सुरभि मुझे कहने लगी आज आप मुझे डिनर पर ले चलिए, मैं सुरभि को डिनर पर ले कर गया और जब मैं सुरभि को डिनर पर ले कर गया तो उस दिन हम दोनों ने कैंडल लाइट डिनर किया और उसके बाद हम लोग वहां से घर लौट आए, उस दिन सुरभि बहुत ज्यादा खुश थी वह मुझे कहने लगी आपके साथ कैंडल लाइट डिनर करना बहुत ही अच्छा रहा और वह रेस्टोरेंट भी बहुत ही अच्छा था। उसके बाद हम दोनों पूरी तरीके से रोमांटिक मूड में हो गए, मैंने सुरभि की चूत उस दिन बड़े अच्छे से मारी काफी समय बाद मैंने सुरभि को चोदा था और उसकी चूत मारकर मैं बहुत खुश था क्योंकि इतने समय बाद सुरभि भी पूरे मूड में थी और जब उसे मैंने अपने नीचे लेटा कर चोदना शुरू किया तो उसकी चीखे निकलने लगी और उस रात मैंने सुरभि की गांड भी मारी। यह पहली बार ही हुआ था इतने सालों में मैने सुरभि की गांड मारी थी लेकिन उसकी टाइट गांड के मजे मुझे बड़े ही अच्छे लगे और उसके बाद मुझे गांड मारने की आदत ही पड़ गई।

कविता पर भी मेरी नजर थी शायद कविता भी मेरी तरफ पूरी तरीके से प्रभावित हो गई। एक दिन मैंने उसे अपने कैबिन में बुलाया और उसके साथ बैठ कर बात की मेरी नजर उसके स्तनों पर ही थी। उसके बड़े और भारी स्तन देखकर मेरी नजर उसके स्तनों से हटने का ही नाम नहीं ले रही थी, मैंने उसके होठों में जब अपनी उंगलियों को रखा तो वह भी मचलने लगी। मैंने उसे कहा तुम ऑफिस के बाद मुझे मिलना वह मुझे ऑफिस के बाद मिली और मैं उसे लेकर एक होटल में चला गया वहां पर मैंने उसके होठों को चूमना शुरू किया तो हम दोनो के शरीर मे और भी अधिक गर्मी बढने लगी, मेरे शरीर में इतनी गर्मी बढ़ने लगी कि मेरा लंड पूरी तरीके से तन कर खड़ा हो गया।

मैंने कविता से कहकर अपना लंड भी चुसवाया, वह मेरे लंड को चुसकर बहुत खुश थी मैंने उसकी चूत को भी बहुत देर तक चाटा। मै जब उसकी चूत को चाटता तो उसके शरीर से पूरी गर्मी बाहर निकल जाती, जब मैंने अपना लंड उसकी चूत के अंदर घुसाया तो उसकी चूत से तरल पदार्थ निकलने लगा और वह चिल्लाते हुए मुझे कहने लगी सर आपने तो मेरी चूत को फाड दिया। मैंने उसे कहा क्या हुआ तुम्हें मजा नहीं आया वह कहने लगी मुझे तो बहुत मजा आ रहा है लेकिन आपका लंड बहुत ही ज्यादा मोटा है। मैं लगातार उसे तेजी से चोद रहा था जब मेरा वीर्य गिर गया तो उसके बाद मैंने उसे उल्टा लेटा दिया और अपने लंड पर तेल की मालिश करते हुए उसकी गांड में घुसा दिया। मेरा लंड उसकी गांड में घुसा तो उसकी गांड से खून निकल आया वह मुझे कहने लगी सर आपने तो मेरी गांड मार ली। मैंने उसे कहा मुझे तो गांड मारने का भी शौक है जब मैं उसकी गांड मार रहा था उसे बहुत दर्द हो रहा था लेकिन मजा भी आ रहा था। काफी देर तक मैं उसकी गांड मारता रहा, जब मेरा वीर्य पतन हो गया तो उसके बाद वह मुझसे अपने प्रमोशन की उम्मीद करने लगी, मैंने उसे खुश करने के लिए प्रमोशन भी दे दिया लेकिन अब वह मुझसे अपनी गांड भी मरवा लिया करती।

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