हम दोनों की तड़प


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Kamukta, hindi sex stories मैं एक बार अपने काम के सिलसिले में जैसलमेर गया हुआ था उसी दौरान मेरी मुलाकात आरोही से हुई आरोही और मैं एक दूसरे से मिले तो हम दोनों को एक दूसरे से मिलना अच्छा लगा। आरोही अपने परिवार के साथ जैसलमेर घूमने के लिए आई हुई थी मेरी उस दौरान आरोही से ज्यादा बात तो नहीं हो पाई, उसके बाद जब मेरी उससे फोन पर बात होती तो उससे मेरी बात फोन पर काफी देर तक हुआ करती थी। मैं भी जल्दी वापस आ चुका था और आरोही मुंबई वापस जा चुकी थी उसके बाद हम दोनों का मिलना हो ही नहीं पाया था मैं अपने काम में ही व्यस्त था मुझे अपने लिए बिल्कुल भी फुर्सत नहीं मिल पाती थी लेकिन आरोही से मेंरी हमेशा बात हुआ करती थी।

जब मेरी उससे बात नहीं होती तो मैं उसे फोन पर मैसेज कर दिया करता यह सिलसिला काफी लंबे समय से चलता आ रहा था मेरा भी आरोही से मिलना संभव नहीं हो पा रहा था लेकिन उसी दौरान मेरे मामा जी का ट्रांसफर मुंबई हो गया मेरे मामा मुझे कहने लगे कभी तुम भी मुंबई आना मैंने उन्हें कहा मामा जी मैं जरूर मुंबई आऊंगा लेकिन उन्हें क्या पता था मैं उनसे मिलने के लिए मुंबई चला जाऊंगा। मैं अपने मामा से मिलने मुंबई गया था उसी दौरान मैं आरोही से मिला उससे मिलकर मैं बहुत ज्यादा खुश था क्योंकि मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मैं आरोही से मिल पाऊंगा आरोही और मैं साथ में समय बिता कर बहुत खुश थे। मैंने सोच लिया था कि मैं कुछ दिनों तक मुंबई में ही रुकूंगा लेकिन मुझे कुछ दिनों बाद ही घर लौटना पड़ा क्योंकि मेरे पापा ने मुझे कहा तुम घर पर आ जाओ कुछ परेशानी हो गई है मैंने उनसे पूछा तो उन्होंने मुझे कुछ भी नहीं बताया लेकिन जब उन्होंने मुझे घर बुलाया तो मैं घर चला गया। मैंने आरोही से कहा मैं तुम्हें दोबारा मिलने के लिए आऊंगा वह कहने लगी ठीक है हम लोग दोबारा मिलेंगे और फिर मैं दिल्ली वापस लौट आया मैं जब दिल्ली वापस लौटा तो मेरे पापा ने मुझे बताया कि हमारी प्रॉपर्टी को लेकर विवाद हो गया है। मैंने उनसे पूछा कि कौन सी प्रॉपर्टी को लेकर विवाद हुआ है तो वह कहने लगे जो हमारा पुश्तैनी मकान था उसे तुम्हारे चाचा जी अपने पास रखना चाहते हैं मैंने उन्हें कहा कि इसका पूरा हक सबको मिलना चाहिए, मेरे पिताजी के तीन भाई हैं तो उसका हिस्सा बराबर होना चाहिए था लेकिन मेरे चाचा जी वह हिस्सा किसी को भी नहीं देना चाहते थे।

पापा ने एक दिन सबको घर पर बुलाया और मेरे पापा ने कहा इसका हिस्सा बराबर होना चाहिए लेकिन मेरे चाचा को इस बात से आपत्ति थी मेरे पापा जी सबसे बड़े हैं इसलिए उन्होंने उस वक्त समझदारी दिखाई और कहा यदि इसके हिस्से नहीं हुए तो यह किसी के पास भी नहीं जा पाएगा और ऐसे ही पड़ा रहेगा। यह सच है कि कुछ ना कुछ सबको मिल जाए और उसी के चलते पापा ने चाचा को मनाने की कोशिश की लेकिन वह नहीं माने फिर पापा ने कहा तुम एक काम करना तुम्हे जो पैसे घर बेच कर मिलेंगे उसमें से ज्यादा हिस्सा तुम रख लेना तो इस बात पर चाचा तैयार हो गए और अब हम लोगों ने अपने घर को बेचने की तैयारी शुरू कर दी। हम लोगों ने एक दो बिल्डरों से बात की थी लेकिन उसमें समस्या यह थी कि हमारा पुश्तैनी घर जिस जगह पर है वहां पर बहुत भीड़ भड़ाका हो चुका है जिस वजह से गाड़ियां अंदर नही आ पाती थी इसलिए हमें उसका उतना दाम नहीं मिल पाया लेकिन हमें जो भी पैसे मिले उसका पापा ने हिस्सा करवा दिया था जो बात पहले ही हुई थी उसी के हिसाब से बटवारा हुआ। चाचा को हिस्से में ज्यादा पैसे दिए गए और उसके बाद सब लोग इस बात से खुश थे पापा को जो पैसे मिले थे पापा ने उससे एक दूसरा घर खरीद लिया क्योंकि हमारा दूसरा घर हमे ठीक ठाक दाम पर हमे मिल  चुका था उसके बाद पापा ने एक छोटा सा घर खरीद लिया था उसमें पापा ने थोड़े बहुत पैसे अपने भी लगाए थे। घर में मैं ही एकलौता हूं इसलिए यह संपत्ति मेंरी ही है, पापा मुझे कहने लगे बेटा हम यह घर किराए पर दे देते हैं क्योंकि अभी तो हम लोग जहां रह रहे हैं वहीं पर रहना ठीक रहेगा मैंने पापा से कहा जी पापा आप देख लीजिए जैसा आपको ठीक लगता है।

हम लोगों ने जो नया घर खरीदा था उसे किराए पर दे दिया और जब हमने उसे किराए पर दिया तो हमें वहां से किराया आने लगा था। आरोही से मेरी कुछ दिनों से बात नहीं हो पाई थी मैंने उसे फोन किया तो वह कहने लगी आजकल तुम कुछ ज्यादा ही बिजी हो तो मैंने आरोही से कहा हां यार तुम्हें क्या बताऊं आजकल घर का एक मसला चल रहा था जो अब जाकर क्लियर हो पाया और अब पापा और मैं फ्री हो चुके हैं। आरोही मुझे कहने लगी तुम मुंबई कब आ रहे हो मैंने उसे कहा अभी तो मुझे आने में थोड़ा समय लगेगा लेकिन कोशिश करूंगा कि मुंबई जल्दी आ जाऊँ जब मैंने आरोही से यह बात कही तो वह कहने लगी कि ठीक है तुम देख लेना तुम्हें जैसा भी ठीक लगे लेकिन मेरा मन भी आरोही से मिलने का था इसलिए मैं कुछ दिनों बाद अपने मामा के पास चला गया। मेरे मामा मुझे कहने लगे तुम्हारा वह पुराना जायदाद का बंटवारा हो चुका है? मैंने उन्हें कहा हां मामा उसका तो बटवारा हो चुका है और अब हम लोगों ने दूसरा घर भी खरीद लिया है। मामा कहने लगे चलो यह तो अच्छी बात है मामा मुझसे पूछने लगे क्या आज तुम मेरे साथ शाम को मेरे ऑफिस में चलोगे? मैंने उन्हें कहा लेकिन मैं आपके ऑफिस जाकर क्या करूंगा तो वह कहने लगे आज हमारे ऑफिस में एक छोटा सा सेमिनार है यदि तुम्हें ठीक लगे तो तुम वहां पर आ सकते हो।

मैंने उन्हें कहा लेकिन वह सेमिनार किस प्रकार का है तो वह कहने लगे वहां पर वह लोग पर्सनैलिटी डेवलपमेंट की क्लास ले रहे हैं तो यदि तुम्हें भी समय मिले तो तुम भी आ जाना मैंने उन्हें कहा ठीक है मामा मैं देखता हूं लेकिन मेरा मन ऑफिस में जाने का नहीं था क्योंकि मैं तो आरोही से मिलना चाहता था। मैंने आरोही से फोन पर बात की तो वह कहने लगी मुझे आने में थोड़ा देर हो जाएगी क्योंकि आज हमारे घर में कुछ मेहमान आए हुए हैं मैंने उससे कहा कोई बात नहीं तुम जैसे ही फ्री हो जाओ तो मुझे तुम फोन कर देना वह कहने लगी ठीक है मैं तुम्हें फोन कर दूंगी। आरोही ने मुझे फोन किया तो मैंने उसे कहा चलो मैं तुम्हें मिलने के लिए आता हूं मैं आरोही को मिलने के लिए चला गया जब मैं आरोही से मिलने के लिए गया तो वह कहने लगी हम लोग आज बीच पर चलते हैं। हम लोग जुहू बीच में चले गए जब हम लोग वहां बैठे हुए थे तो हम दोनों एक दूसरे से बात कर रहे थे। आरोही मुझसे पूछने लगी तुम तो जैसे गायब ही हो गए थे तुमसे बात ही नहीं हो पा रही थी। मैंने आरोही से कहा यार तुम्हें क्या बताऊं मेरे चाचा जी ने हमारे पुश्तैनी घर पर कब्जा कर लिया था और वह उसे छोड़ना ही नहीं चाहते थे लेकिन पापा के समझाने पर वह मान गए और अब सब कुछ ठीक है। मैंने उससे कहा मैं भी तो तुम्हें बहुत मिस कर रहा था वह कहने लगी हां यह बात तो तुम सही कह रहे हो मैं भी सोच रही थी कि आखिरकार तुम्हारे पास क्या समय नहीं है जो तुम मुझसे बात ही नहीं कर पा रहे थे। वह मुझसे पूछने लगी तुम कितने दिनों तक यहां पर रुकने वाले हो मैंने आरोही को बताया मैं तुमसे मिलने के लिए यहां पर आया हूं और कुछ दिनों तक रुकूँगा क्योंकि पिछली बार मैं तुम्हारे साथ ज्यादा समय नहीं बिता पाया था लेकिन इस बार हम दोनों साथ में अच्छा समय बिताएंगे।

मैं आरोही के चेहरे की तरफ देख रहा था और आरोही मेरी तरफ देख रही थी मैंने आरोही से कहा मुझे तुम्हारे होंठ देखकर कुछ अलग ही फील हो रहा है तो वह कहने लगी तुम्हें ऐसा क्यों लग रहा है तो मैंने उसे कहा मैं तुम्हारे होठों को किस करना चाहता हूं। उसने भी कोई आपत्ति नहीं जताई और मैंने उसके होठों को किस कर लिया, जब मैंने आरोही के होठों को किस किया तो वह पूरे जोश में आ गई। वह मुझे कहने लगी हम लोग कहीं चलते हैं जहां सिर्फ हम दोनों ही हो। मैंने उसे कहा लेकिन मैं यहां किसी को नहीं जानता तो वह कहने लगी मैं अपनी एक सहेली को फोन करती हूं और शायद घर वह घर पर अकेली होगी, उसने अपनी सहेली को फोन किया और हम दोनो वहां चले गए। जब हम दोनों उसकी सहेली के घर पहुंचे तो वह मुझे कहने लगी अब बताओ तुम्हें क्या अलग फिल हो रहा था, मैंने उसे कहा तुम दरवाजा बंद कर दो उसने दरवाजे को बंद किया और मैंने उसे अपनी गोद में बैठा लिया।

जब वह मेरी गोद में बैठी तो मैंने उसके होठों को चूमना शुरू किया और बड़े अच्छे से मैं उसके होठों को चूमता, मैंने जब उसके स्तनों को अपने मुंह में लेकर चूसने शुरू किया तो वह उत्तेजित हो थी। मैंने जब उसकी योनि पर अपनी उंगली क लगाया तो उसकी योनि से गिला पदार्थ बाहर की तरफ को निकल रहा था उसकी योनि इतनी ज्यादा गीली हो चुकी थी कि अब उससे बिल्कुल भी कंट्रोल नहीं हो रहा था। मैंने जल्दी से उसे नंगा किया और उसकी चूत पर अपने लंड को सटा दिया उसकी योनि की गर्मी इतनी ज्यादा बढ़ने लगी थी कि वह उससे भी बर्दाश्त नहीं हो रहा थी। मैंने एक ही झटके में अपने 9 इंच मोटे लंड को उसकी योनि के अंदर प्रवेश करवा दिया जैसे ही मेरा मोटा लंड उसकी योनि के अंदर प्रवेश हुआ तो वह चिल्ला उठी उसे काफी दर्द महसूस हुआ। उसकी मादक आवाज से मैं पूरे जोश में आ जाता और उसके दोनों पैरों को चौड़ा करते हुए बड़ी तेजी से धक्के देता। मैं उसे बहुत तेजी से धक्के मार रहा था जिससे कि उसका पूरा बदन हिल जाता और मैं पूरे जोश में आ जाता, मैंने काफी देर तक उसे ऐसे ही चोदा लेकिन जब उसके योनि की गर्मी बढने लगी तो मेरा वीर्य बाहर की तरफ को निकल पड़ा और उसे बहुत अच्छा महसूस हुआ। हम दोनों की इच्छाएं पूरी हो चुकी थी और मैं कुछ दिनों बाद अपने घर वापस दिल्ली लौट आया।

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