दोस्त की प्यासी मामी


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मेरा नाम निखिल है मैं गुजरात के भावनगर का रहने वाला हूं, मेरी उम्र 25 वर्ष है। मेरे पिताजी और मैं हमेशा सुबह अपनी दुकान में चले जाते हैं और शाम के वक्त ही दुकान से लौटते हैं, मेरे पिताजी का चूड़ियों का कारोबार है, यह दुकान मेरे पिताजी ने 20 वर्ष पहले खोली थी और तब से हमारे घर का गुजारा इसी काम से चल रहा है। शुरुआत में मेरे पिताजी सिर्फ रिटेल का काम करते थे लेकिन जैसे जैसे हमारा काम बढ़ने लगा तो हम लोगों ने होलसेल का काम भी शुरू कर दिया, अब हमारा काम काफी अच्छा चलता है और पहले से काफी ज्यादा लोग हमारी दुकान पर आते हैं। मुझे भी अपने पिताजी के साथ काम करते हुए 5 वर्ष हो चुके हैं और इन 5 वर्षों में मैंने भी अपने पिताजी के साथ दुकान में पूरी मेहनत की है, उसी मेहनत के बलबूते पर हम लोग एक अच्छा मुकाम हासिल कर पाए। मेरे पापा मुझसे बहुत खुश रहते हैं और वह हमेशा ही मेरी बड़ी तारीफ करते हैं, वह सब लोगों के सामने गर्व से कहते हैं कि निखिल ने हीं दुकान का काम अच्छे से संभाला है, उसके बाद ही हमारी इतनी अच्छी तरक्की हो पाई है।

हमने अपने इसी कारोबार से अपनी आर्थिक स्थिति को बहुत मजबूत कर लिया है। एक दिन मैं अहमदाबाद कुछ काम से चला गया और मैं जब अहमदाबाद गया तो मेरे दोस्त संतोष ने मुझे कहा कि तुम मेरे पास ही रुक जाना, मैंने उसे कहा ठीक है मैं तुम्हारे पास ही रुक जाऊंगा। संतोष भी भावनगर का रहने वाला है और अब वह अहमदाबाद में काम करता है, उसे अहमदाबाद में काम करते हुए काफी समय हो चुका है। संतोष मेरे बचपन का बहुत अच्छा दोस्त है, जब भी वह भावनगर आता है तो मुझसे मिलने जरूर आता है इसीलिए मैंने भी सोचा कि जब मैं अहमदाबाद जा रहा हूं तो संतोष को फोन कर देता हूं परन्तु संतोष ने मुझे कहा कि तुम मेरे पास ही रहोगे और इसी वजह से मैं संतोष के पास रुक गया। मेरा अहमदाबाद में काम था इसीलिए मैं अहमदाबाद कुछ दिनों के लिए रुक गया। जब मैं संतोष से मिला तो संतोष भी मुझसे मिलकर बहुत खुश हुआ,  वह कहने लगा यह तो मेरे लिए किसी सरप्राइस से कम नहीं है कि तुम अहमदाबाद आ गए और तुमने मुझे फोन किया।

संतोष बहुत ही खुश था, मैंने संतोष से कहा कि मैं अभी कुछ दिन अहमदाबाद में रखूंगा इसीलिए तुम कुछ दिनों के लिए छुट्टी ले लेना, वह कहने लगा ठीक है मैं कुछ दिनों के लिए अपने काम से छुट्टी ले लूंगा। संतोष और मैं मेरे काम से चले गए, मुझे अहमदाबाद में किसी व्यक्ति से मिलना था क्योंकि वह लोग काफी कम दाम पर चूड़ियों का सामान उपलब्ध करा रहे थे, मैंने सोचा एक बार उनसे मैं मिल लेता हूं, मैंने संतोष से कहा कि हम लोग वहां पर चलते हैं। हम दोनों ही उनके पास चले गए, जब मैं वहां पर गया तो उन्होंने मुझे अपना सामान दिखाया, मुझे थोड़ा बहुत अच्छा लगा इसलिए मैंने सोचा कि थोड़ा बहुत सामान मैं रखवा देता हूं। मैंने अपने पापा को फोन किया और उन्हें कह दिया कि मैं कुछ सामान भिजवा रहा हूं आप उसे ट्रांसपोर्ट वाले से ले लेना, वह कहने लगे ठीक है तुम चिंता मत करो मैं ट्रांसपोर्ट वाले से वह सामान ले लूंगा, तुम मुझे उस ट्रांसपोर्ट वाले का नंबर दे देना। मैंने वह सामान बुक करवा दिया और ट्रांसपोर्ट में ही मैंने खुद वह समान रखवाया। जब मैं और संतोष वापस आए तो संतोष मुझसे कहने लगा कल हम लोग मेरे मामा के घर चलेंगे, मैंने उसे कहा मैं वहां पर क्या करूंगा, वह कहने लगा नहीं तुम्हें तो मेरे साथ चलना होगा क्योंकि काफी समय से मेरे मामा और मामी मुझे अपने पास बुला रहे हैं लेकिन मैं उनके पास नहीं जा पा रहा हूं, मैंने वैसे भी छुट्टी ले ली है इसलिए हम लोग कल शाम को उनके पास चलते हैं। मैं भी संतोष को मना नहीं कर पाया क्योंकि वह भी मेरी किसी बात के लिए कभी भी मना नहीं करता, उस दिन संतोष और मेरी काफी पुरानी बातें हुई। मैंने संतोष से बात की तो संतोष मुझे कहने लगा मैं कुछ दिनों से बहुत परेशान चल रहा हूं, मैंने संतोष से पूछा कि तुम्हारी परेशानी का क्या कारण है, वह कहने लगा मेरी एक गर्लफ्रेंड है लेकिन मैं उससे शादी नहीं कर सकता। मैंने उसे पूछा कि तुम उससे शादी क्यों नहीं कर सकते, वह मुझे कहने लगा की उसके घर वालों को हमारे रिलेशन के बारे में पता चल चुका था इसलिए उसके घर वालों ने उसकी सगाई करवा दी इसी वजह से हम दोनों चुपके से मिलते हैं, मैं उससे शादी करना चाहता हूं परंतु मेरी उसके घर पर बात करने की हिम्मत नहीं होती और वह भी अपने घर पर बात करने की हिम्मत नहीं दिखा पाती।

मैंने संतोष से कहा यदि तुम इसी प्रकार से सोचोगे तो शायद तुम दोनों एक दूसरे को कभी भी एक्सेप्ट नहीं कर पाओगे और उस लड़की की शादी हो जाएगी। मुझे संतोष ने उसकी थोड़ी बहुत जानकारी दी लेकिन मुझे जितना लगा मुझे यही प्रतीत हुआ कि वह दोनों सिर्फ अपने शारीरिक जरूरतों को पूरा कर रहे हैं और उसे ज्यादा उन दोनों के बीच में कोई प्रेम नहीं है इसीलिए मैंने इस बारे में संतोष से ज्यादा बात नहीं की। अगले दिन जब हम लोग संतोष के मामा और मामी के घर पहुंचे तो संतोष ने मेरा परिचय अपने मामा और मामी से करवाया, उसके मामा तो काफी अच्छे और बात करने में बहुत व्यवहारिक थे वह किसी अच्छे पद पर भी हैं और उनका घर भी काफी बड़ा था, मुझे उनसे मिलकर बहुत ही अच्छा लगा। जब मैं संतोष की मामी से मिला तो मुझे ऐसा लग रहा था जैसे वह एक सेक्स की प्यासी महिला है और उनकी नज़रों से ही बहुत हवस टपक रही थी। मैंने उन्हें जब देखा तो उनकी कातिल नजरें जब मुझ पर पड़ती तो मुझे ऐसा प्रतीत होता कि शायद वह मुझसे कुछ मांग रही है। उस रात को हम लोगों ने साथ में डिनर किया जब मैं और संतोष एक रूम में लेटे हुए थे तो मैंने संतोष को देखा, वह सो चुका था।

उसकी मामी जब दरवाजे पर आई तो उन्होंने लाल रंग की नाइटी पहनी हुई थी और उस नाइटी में वह बहुत ही सुंदर लग रही थी। मैंने उनसे कहा आप तो बड़ी सुंदर लग रही हैं उनके 36 नंबर के स्तन  उनकी नाइटी से साफ बाहर की तरफ दिखाई दे रहे थे। उन्होंने जब अपने होठों पर हाथ लगाया तो मैं समझ गया कि यह मेरे लंड की भूखी है, मैंने भी अपने लंड पर हाथ लगा लिया। उन्होंने मुझे वही दरवाजे पर किस कर लिया और कहने लगी आओ हम लोग दूसरे रूम में चलते हैं। हम दोनों वहां चले गए जब मैं वहां पर गया तो वह मेरे होठों को किस कर रही थी और बड़े अच्छे से उन्होंने मेरे होठो को चूसा। मैंने जब उनकी लाल रंग की सेक्सी नाइटी उतारी तो वह पूरे मूड में हो चुकी थी, उन्होंने भी मुझे कहा कि तुम मेरी प्यास को मिटा दो। मैंने जब उनकी पैंटी और ब्रा को उतारा तो उनकी योनि पर मैंने हाथ लगाया वह गिली हो चुकी थी, उनकी योनि पर एक भी बाल नहीं था। मैंने उन्हें वहीं बिस्तर पर लेटा दिया जब मै उनकी गांड को दबा रहा था और मैंने धीरे से अपने लंड को योनि पर लगाते हुए अंदर की तरफ से धकलेना शुरू किया। जैसे ही मेरा लंड उनकी योनि के अंदर चला गया तो मुझे ऐसा लग रहा था जैसे वह मेरा पूरा साथ दे रही है, उन्होंने अपने दोनों पैरों को खोल लिया और मुझे कहने लगी कम बेबी आओ मेरी योनि की इच्छा पूरी कर दो मै काफी समय से मैं भूखी बैठी थी। मैंने भी उनके दोनों पैरों को इतना चौड़ा कर लिया कि मेरा आसानी से उनकी योनि के अंदर जा रहा था और वह जिस प्रकार से अपने मुंह से मादक आवाज मै सिसकिंया ले रही थी वह तो बड़ी ही कातिलाना थी। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे वह किसी पोर्न फिल्म की हीरोइन हो और मैं किसी पोर्न मूवी का हीरो हू। जब मैं उन्हें धक्के मारता तो उनके स्तनों पर मैंने जैसे ही अपने हाथ को रखा तो वह पूरे मूड में आ गई। मैंने जब उनके स्तनों का रसपान किया तो वह बिल्कुल भी नहीं रह पाई और उनकी योनि से तरल पदार्थ बाहर की तरफ को निकलना शुरू हो गया। मैं भी ज्यादा समय तक उनकी योनि की गर्मी को नहीं झेल पाया, जब मेरा वीर्य पतन हुआ तो हम दोनों एक दूसरे के साथ काफी देर तक लेटे रहे। मैंने उस रात उनके साथ चार बार संभोग किया लेकिन मेरी इच्छा बिल्कुल ही नहीं भर रही थी। मै उसके बाद भी उन्हें फोन किया करता जब भी मुझे सेक्स की आवश्यकता पड़ती तो मैं संतोष की मामी के पास चला जाता हूं।