दोस्त की बहन की कामुकता शांत की


antarvasna, kamukta मेरा नाम तुषार है मैं दिल्ली का रहने वाला हूं मैं जिस ऑफिस में काम करता हूं उस ऑफिस में मेरी एक लड़के के साथ बहुत अच्छी दोस्ती हो गई, उसका नाम संजय है, उसने कुछ महीनों पहले ही ऑफिस ज्वाइन किया है जब उसने ऑफिस जॉइन किया तो उस वक्त मेरी उससे काफी अच्छी दोस्ती हो गई। एक दिन मुझे संजय कहने लगा कि मेरी फैमिली कहीं घूमने का प्लान बना रही है यदि तुम्हारे दिमाग में भी ऐसा कोई विचार हो तो तुम भी अपनी फैमिली से बात कर लो हम लोग सब साथ में घूमने का टूर बना लेते हैं, मैंने उसे कहा तुम मुझे आज का वक्त दो आज शाम को ही मैं अपने मम्मी पापा से बात कर लूंगा यदि वह आने के लिए तैयार हो जाएंगे तो मैं तुम्हें कल ऑफिस आ कर बता देता हूं, मैं जब शाम को घर पर गया तो मैंने अपने मम्मी पापा से इस बारे में बात की तो मेरे पापा कहने लगे यदि तुम्हारे दोस्त ने घूमने का प्लान बनाया है तो घूमने चलते हैं।

अगले दिन मैंने संजय को ऑफिस में कह कि मेरे माता-पिता तो तैयार हो चुके हैं तुम यह बताओ हम लोग घूमने कहां जाएं? वह कहने लगा हम लोग घूमने के लिए मालदीव चलते हैं। मैंने उसे कहा लेकिन वहां तो काफी महंगा पड़ जाएगा और तुम्हें तो पता है कि वहां की फ्लाइट भी बहुत महंगी है, संजय मुझे कहने लगा घूमने भी तो हम लोग साल दो साल में जाते हैं, हम लोग इतना तो खर्च कर ही सकते हैं कि वहां हम लोग घूम आए, मेरा तो बिल्कुल भी मन नहीं था क्योंकि जब उसने मालदीप का नाम लिया तो मुझे लगा शायद खर्चा बहुत हो जाएगा परंतु उसने सारा कुछ बंदोबस्त करवा दिया तो मैं भी उसे मना नहीं कर पाया और हम लोग जब एयरपोर्ट पहुंचे तो वहां उसने मुझे अपने परिवार के सदस्यों से मिलवाया, मैंने भी उसको अपने परिवार से मिलवाया हम लोग पहली बार ही एक दूसरे के परिवार से मिले थे लेकिन सब लोग बहुत ही खुश थे, उसने मुझे अपनी बहन से मिलवाया उसकी बहन बड़ी ही अच्छी है, उसकी बहन का नाम माधवी है, वह बहुत ही फ्रेंक है और सबसे ज्यादा वही इंजॉय कर रही थी।

जब हम लोग फ्लाइट में बैठ गए तो मेरे साथ संजय और माधवी बैठे हुए थे हम तीनों आपस में बात कर रहे थे और मुझे माधवी को देखकर ऐसा लगता कि जैसे वह मुझ पर लाइन मार रही है लेकिन मुझे यह डर था कि कहीं यह बात संजय को पता चल गई तो वह मेरे बारे में क्या सोचेगा इसलिए मैंने माधवी से इस बारे में कोई बात नहीं की। हम लोग जब मालदीप पहुंच गए तो वहां समुद्र किनारे हमारा होटल था वहां से समुद्र की लहरें साफ दिखाई दे रही थी मुझे बहुत अच्छा लगता और मैंने अपने पापा मम्मी से कहा आपको कैसा लग रहा है, वह कहने लगे बेटा हमने तो कभी जीवन में सोचा भी नहीं था लेकिन हमें यहां आकर बहुत अच्छा लग रहा है और हम लोग बहुत खुश भी हैं। संजय के परिवार के सदस्य भी सब खुश थे और मैं जब माधवी के साथ बैठा हुआ था तो माधवी मुझसे कहने लगी आप बड़े ही अच्छे व्यक्ति हैं और आप के साथ मुझे बहुत अच्छा लग रहा है, मैंने उसे कहा क्यों,  तुम्हे मेरे साथ क्यों अच्छा लग रहा है? वह मुझे कहने लगी ना जाने आपको देखकर मुझे ऐसा क्यों लग रहा है कि आपको मैंने पहले भी कहीं देखा है और मैं जैसे आपको पहले से ही जानती हूं। मैंने उसे कहा लेकिन मैंने तो तुम्हें आज से पहले कभी नहीं देखा, वह हंसने लगी और कहने लगी क्या आपने मुझे आज से पहले कभी नहीं देखा? मैंने उसे कहा नहीं मैंने तुम्हें आज से पहले कभी नहीं देखा। वह कहने लगी जब हम लोग फ्लाइट में आ रहे थे तो क्या आपने मुझे देखा नहीं था, मुझे भी हंसी आ गई और मैं कहने लगा माधवी तुम भी कमाल करती हो।

हम दोनों हंसी मजाक कर रहे थे तो तभी संजय अभी आ गया और संजय कहने लगा तुम दोनों यहां बाहर बैठकर क्या कर रहे हो? मैंने उसे कहा बस हम लोग यहां समुद्र की लहरों का मजा ले रहे हैं। वह कहने लगा पापा मम्मी भी बहुत खुश हैं और सब लोग बहुत इंजॉय कर रहे हैं। संजय मेरे कानों में कहने लगा हम लोग बाहर बीयर पीने चलते हैं, मैंने उसे कहा नहीं मेरा मन नहीं हो रहा तो वह कहने लगा ठीक है मैं ही चले जाता हूं। वह बार में चला गया माधवी और मैं साथ में बैठे हुए थे माधवी मुझे कहने लगी मुझे घूमने का बहुत शौक है और मैं घूमने के लिए अपने कॉलेज से बहुत बार गई हूं लेकिन यह मेरा पहला मौका है जब मैं देश से बाहर घूमने आई हूं और मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।

मैंने उसे कहा क्या तुम्हें संजय ने इस बारे में पहले बताया था? वह कहने लगी नहीं मुझे भैया ने इस बारे में पहले नहीं बताया था उन्होंने मुझे जाने से कुछ दिन पहले ही बताया लेकिन मुझे बहुत अच्छा लगा जब उन्होंने कहा कि हम लोग विदेश घूमने के लिए जा रहे हैं। हम दोनों बात कर रहे थे उसी दौरान माधवी ने मेरे पेट पर हाथ रख दिया मैंने उसे कहा तुम यह क्या कर रही हो। वह कहने लगी गलती से मेरा हाथ आपके पेट पर लग गया उसके लिए मैं आपसे माफी मांगना चाहती हूं। वह गलती नहीं थी उसने जानबूझकर ऐसा किया था, जब मैंने भी उसके पेट पर हाथ को लगाया तो वह कहने लगी अपनी भी गलती से मेरे पेट पर हाथ लगाया। मैंने उसे कहा नहीं मैंने तो जानबूझकर लगाया है। वह मुझे कहने लगी मैं आपके साथ सेक्स करना चाहती हूं। मैंने उसे कहा लेकिन संजय इस बारे में क्या सोचेगा, वह कहने लगी यह मेरा खुद का फैसला है इसमें भैया का कोई लेना देना नहीं है और यदि मेरा मन आपके साथ सेक्स करने का है तो मुझे आपके साथ सेक्स करने से कोई नहीं रोक सकता।

हम दोनों रूम में चले गए, जब हम लोग रुम में लेटे हुए थे तो वह मेरे ऊपर आकर लेट गई और मुझे किस करने लगी। वह मुझे बड़े अच्छे से किस कर रही थी उसने जब मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू किया तो मुझे बहुत अच्छा महसूस होने लगा उसने मेरे लंड से पानी निकाल कर रख दिया। मैंने उससे पूछा माधवी तुम जब मेरे लंड को अपने मुंह में ले रही हो तो मुझे अच्छा लग रहा है मुझे ऐसा लग रहा है जैसे तुमने आज तक ना जाने कितने लंड चूसे हो। वह मुझे कहने लगी आज से पहले मैंने बहुत लंड मुंह मे लिए है मैने कॉलेज के प्रोफेसर का भी लंड लिया है पर आपका लंड बड़ा ही मजेदार है। मैंने जब उसके बदन से कपडो को निकालना शुरू किया तो उसकी योनि गीली हो चुकी थी। मैंने उसकी योनि के अंदर उंगली को डाल दिया जब मेरी उंगली उसकी योनि के अंदर जाती तो वह पूरे तरीके से मूड मे आ गई। वह मुझे कहने लगी आप अपनी उंगली को अंदर बाहर करते रहिए मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा है।

मैंने उसकी चूत मे अपनी उंगली को काफी देर तक अंदर बाहर किया, जब उसकी योनि कुछ ज्यादा ही हो गई तो मैंने अपने लंड को उसकी योनि के अंदर डाल दिया। जैसे ही मेरा लंड उसकी योनि के अंदर प्रवेश हुआ तो उसे बहुत अच्छा लगने लगा, मैं उसे लगातार तेज गति से धक्के दे रहा था। कुछ देर तक तो मैंने उसे अपने नीचे लेटाकर संभोग किया लेकिन मेरी उत्तेजना चरम सीमा पर पहुंच गई तो मैंने उसे घोड़ी बना दिया और घोड़ी बनाकर चोदना शुरू किया। मैं जब उसकी चूतडो पर प्रहार करता तो वह मुझे कहती आप ऐसे ही मेरी चूतडो पर प्रहार करते रहिए मुझे बहुत अच्छा लग रहा है जब आपका लंड मेरी योनि के अंदर ज रहा है। जब मेरा लंड उसकी योनि के अंदर बाहर होता तो मुझे बहुत मजा आ रहा था मैंने उसके साथ 5 मिनट तक संभोग किया लेकिन 5 मिनट के दौरान मैंने उसे 300 झटके मारे मुझे बहुत मजा आया जब मेरा वीर्य उसकी योनि में गिर गया तो वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत अच्छा लगा, मुझे तो बिल्कुल उम्मीद भी नहीं थी कि मैं आपके साथ सेक्स का मजा ले पाऊंगा लेकिन आपने तो मेरी इच्छा पूरी कर दी। मैं बहुत ही खुश हूं आपने जिस प्रकार से मेरी इच्छा को पूरा किया। हम दोनों उसके बाद बीच के किनारे बैठ गए, जब संजय आया तो वह कहने लगा तुम लोग अभी तक यहीं बैठे हुए हो। हम दोनों एक दूसरे के मुंह पर देख कर हंसने लगे और कहने लगे तुम तो अपना एंजॉय करके आ गए, हम यहीं बैठे हुए हैं। मैंने उसे कहा हम दोनों यही बैठकर इंजॉय कर रहे हैं हमें यही मजा आ रहा है लेकिन मुझे अंदर से बहुत हंसी आ रही थी क्योंकी मैने उसकी बहन चोद दी थी।