चूत अब भी प्यासी है


hindi sex stories, kamuktaमेरी शादी को दो वर्ष हुए थे और मैं अपनी शादी से बहुत खुश थी, मेरे माता-पिता ने शादी में कोई भी कमी नहीं रखी लेकिन मुझे कहां पता था कि मेरे पति की नियत में ही खोट होगी, उन्होंने मुझे कभी भी वह प्यार नहीं दिया जो मुझे चाहिए था उन्होंने हमेशा ही मुझे प्रताड़ित किया और हर किसी के सामने वह मुझे बेइज्जत करते थे मैं इस बात से बहुत ज्यादा दुखी हो चुकी थी लेकिन फिर भी मैं अपनी शादी के रिश्ते को निभा रही थी, मैंने अपने पति को कभी कोई कमी महसूस नहीं होने दी परंतु वह हर रोज मुझ में कोई ना कोई कमी निकाला करते थे, मैं यह बात अपनी मम्मी से कहती तो मेरी मम्मी कहती की बेटा यह तो परिवार में होता रहता है। उन्हें लगता है कि शायद यह छोटा-मोटा झगड़ा है मेरी मम्मी मुझे कहती कि बेटा तुम मैनेज कर के चला करो।

मैं अब बहुत ज्यादा परेशान हो चुकी थी क्योंकि मेरी सास और मेरे पति मुझ पर बहुत ही ज्यादा दबाव बनाते थे और वह लोग हर एक चीज के लिए मुझे ताने दिया करते थे, मुझे जब पता चला कि मेरे पति का किसी और के साथ अफेयर है तो मैं उस बात से बहुत ही दुखी हुई और मैंने उनका साथ छोड़ने का फैसला कर लिया मुझे नहीं पता था कि मेरे साथ क्या होगा क्योंकि ना तो मैं अपने घर लौट सकती थी और ना ही मैं कहीं और जा सकती थी पर मैंने हिम्मत नहीं हारी और मैं एक दिन घर छोड़कर चली गई, मैं घर छोड़ कर हिमाचल चली गई जब मैं हिमाचल के एक छोटे से कस्बे में पहुंची तो वहां मैं किसी को नहीं जानती थी क्योंकि मैं एक महिला थी इसके लिए मुझे बहुत दिक्कत हो रही थी परंतु मुझे उस वक्त राजेश ने साथ दिया, राजेश एक नौजवान युवक था और उसने मेरा पूरा साथ दिया। राजेश ने मुझे कहा कि तुम्हें कोई दिक्कत नहीं होगी उसने ही मुझे रहने के लिए एक जगह दिलवाई जहां पर मैं रह सकती थी वह ज्यादा बड़ा घर तो नहीं था  पर रहने के लिए ठीक था। मुझे एक स्कूल में पढ़ाने का भी मौका मिल गया क्योंकि मैं पढ़ी लिखी थी इसलिए मैं वहां पर पढ़ाने लगी, मैं जब बच्चों को पढ़ाती तो मुझे बहुत अच्छा लगता क्योंकि एक तो मेरा समय बच्चों के साथ व्यतीत होता और दूसरा मैं अपने आप को पहले से अच्छा महसूस कर रही थी।

जब मैं और राजेश साथ में होते तो मैं राजेश से अपने दिल की बात शेयर किया करती और मैंने राजेश को अपनी पर्सनल लाइफ के बारे में सब कुछ बता दिया था मैंने उसे बताया कि किस प्रकार से मैंने अपने पति का घर छोड़ा और उन लोगों ने मुझ पर कितना दबाव बनाया जिससे मैं बहुत ज्यादा तनाव में आ गई थी और कुछ समय तक मैं डिप्रेशन में भी रही, राजेश कहने लगा लेकिन अब तुम पहले से ज्यादा खुश हो और तुम्हारे चेहरे पर यह खुशी साफ झलकती है, मैंने राजेश से कहा हां मैं पहले से ज्यादा खुश हूं। मैं जब हिमाचल आयी तो मैंने किसी से भी संपर्क नहीं किया मैं उस छोटे से कस्बे में ही रह कर अपना जीवन को जीना चाहती थी मुझे बहुत शांति मिलने लगी थी और मैं ज्यादातर समय बच्चों के साथ ही बिताती थी मैं घर पर भी बच्चों को फ्री में ट्यूशन पढ़ाने लगी थी और मेरे पास काफी बच्चे आने लगे थे, मुझे जो तनख्वाह मिलती उसे मैं जमा कर लेती ताकि मैं घर ले सकूं और मैं वह पैसे बैंक में जमा करने लगी कुछ समय बाद मुझे लगा कि जिस जगह मैं रह रही हूं वह काफी छोटा कमरा था इसलिए मुझे दूसरी जगह पर घर देखना पड़ेगा, मैंने घर देखना तलाश किया और मुझे एक घर मिला, वह लोग काफी अच्छे थे और उन्होंने मुझे कहा कि तुम यहां पर रहोगी तो तुम्हें कोई भी दिक्कत नहीं होगी, राजेश भी उसी कस्बे में एक छोटी सी दुकान चलाया करता था और उसकी दुकान भी ठीक-ठाक चलती थी लेकिन राजेश ने मुझे कभी भी अपने बारे में नहीं बताया राजेश ने सिर्फ मुझे यह बताया था कि उसकी शादी होने वाली थी परंतु उसकी शादी हो नहीं पाई, राजेश मुझे कभी भी अपने घर अपने माता पिता से मिलवाने नहीं ले गया। मैं भी राजेश को शायद पसंद करने लगी थी क्योंकि जब भी मुझे किसी चीज की जरूरत होती तो सबसे पहले मैं राजेश को ही याद किया करती।

एक दिन मैं घर पर ही थी और उस दिन मेरे फोन पर एक अननोन नंबर से कॉल आया, जब मैंने वह फोन उठाया तो मेरी मम्मी सामने से कहने लगी बेटा तुम कहां चली गई, मैंने अपनी मम्मी से कहा देखो मम्मी आप लोग मुझे अब भूल जाओ मैं ना तो आपके साथ रहना चाहती हूं और ना ही अपने ससुराल में मैं खुश थी इसलिए मेरे पास और कोई रास्ता नहीं था और मुझे यह कदम उठाना पड़ा, मेरी मम्मी कहने लगी बेटा तुम जहां भी हो वापस आ जाओ, मैंने अपनी मम्मी से कहा मम्मी मैं जहां भी हूं मैं खुश हूं लेकिन अब घर लौटना मेरे लिए मुश्किल होगा, मैं घर नहीं लौट सकती। मेरी मम्मी बहुत दुखी हो गई और वह रोने लगी, मैंने अपनी मम्मी को समझाया और कहा मम्मी वैसे भी मैं अपने ससुराल में बिल्कुल खुश नहीं थी उन लोगों ने मेरे ऊपर बहुत अत्याचार किया जिससे कि मैं पूरी तरीके से टूट चुकी थी और डिप्रेशन में भी चली गई थी इसीलिए मैंने अलग रहना ही बेहतर समझा और अब मैं अलग रहकर खुश हूं यदि आप चाहती हैं कि मैं अपने जीवन में खुश रहूं तो आप मुझे भूल जाइए, मेरी मम्मी मुझे कहने लगी बेटा तुम वापस आ जाओ हम लोग तुम्हें कभी भी तुम्हारे ससुराल के बारे में नहीं कहेंगे।

मैंने फोन काट दिया और उसके बाद मेरी मम्मी मुझे कॉल करती रही पर मैंने फोन नहीं उठाया मैंने अपना नंबर भी बदली कर लिया ना जाने मेरी मम्मी को मेरा नंबर कहां से मिला मैं उस दिन बहुत ज्यादा दुखी थी क्योंकि मैं अपनी मम्मी को कभी तकलीफ नहीं देना चाहती थी लेकिन उस दिन मुझे ऐसा लगा कि मैंने अपनी मम्मी के साथ बहुत ही गंदे तरीके से बात की उस दिन मेरा मूड बहुत ज्यादा खराब था राजेश मुझे मिलने मेरे घर पर आया तो मैं चुपचाप एक कोने में बैठी हुई थी और मैंने राजेश से भी बात नहीं की क्योंकि मेरे दिमाग में सिर्फ मेरी मम्मी का ख्याल चल रहा था। राजेश मुझे कहने लगे आज तुम बहुत परेशान लग रही हो? मैंने राजेश से कहा बस तुम रहने दो आज मुझे तुमसे भी बात नहीं करनी और जब राजेश ने मुझे जोर देते हुए कहा तो मैंने उसे सब कुछ बता दिया, मैंने जब राजेश को बताया कि आज मेरी मम्मी का फोन आया था और उनसे मैंने बड़ी ही गलत तरीके से बात की तो वह कहने लगा तुम्हारी मम्मी तुम्हें लेकर परेशान होगी तुम्हें अपने घर लौट जाना चाहिए, मैंने राजेश से कहा मैं अब किसी भी सूरत में अपने घर नहीं जाना चाहती यदि मैं अपने घर लौटी तो मेरे ससुराल वाले मुझे अपने साथ ले जाएंगे और मैं नहीं चाहती कि मैं अपने पति के साथ अब आगे का जीवन बिताऊँ क्योंकि वह मुझे बिल्कुल भी पसंद नहीं है और जिस प्रकार से उनका रवैया मुझे लेकर है वह तो मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता, मैं अब यहीं पर खुश हूं और अपना आगे का जीवन भी यहीं बिताना चाहती हूं, राजेश मुझसे कहने लगा लेकिन एक महिला को एक पुरुष की जरूरत पड़ती ही है तुम्हें घर लौट जाना चाहिए और अपने परिवार वालों से बात करनी चाहिए, मैंने राजेश से कहा अब मैं बिल्कुल भी घर जाने के बारे में नहीं सोचती और ना ही मैं घर जाना चाहती हूं। राजेश ने भी उसके बाद मुझे कुछ नहीं कहा और वह भी थोड़ी देर चुप चाप बैठ गया। मेरा राजेश से कहा राजेश तुम अपनी जगह सही हो और मैं अपनी जगह सही हूं इसलिए मैं अब दोबारा से वही गलती नहीं कर सकती जो मैंने पहले की।

राजेश ने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे कहा आकांक्षा तुम बहुत हिम्मत वाली हो मैं तुम्हारा साथ हमेशा दूंगा। राजेश ने मेरी जांघ पर हाथ रख दिया जब उसने मेरी जांघ पर हाथ रखा तो उसके बाद वह मेरे होठों को किस करने लगा। इतने समय बाद किसी ने मेरे होठों को अपने होठों में लिया था मैं भी अपने आप पर काबू नहीं रख सकी। राजेश के होठों को मै चूमने लगी क्योंकि हर एक व्यक्ति के लिए सेक्स भी बहुत जरूरी है। मैंने इतने समय से किसी के साथ भी सेक्स नहीं किया था मैंने राजेश के लंड को अपने हाथ में पकड़ लिया और हिलाने लगी। राजेश मुझे कहने लगा आकांक्षा तुमने मेरे लंड को हाथ में लिया तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। राजेश भी मेरे स्तनों को अपने मुंह में ले रहा था वह मेरे स्तनों को बड़े अच्छे से चूसता रहा उसने मेरे स्तनों का रसपान बहुत देर तक किया। जब वह पूरी तरीके से संतुष्ट हो गया तो उसने मुझे कहा तुम मेरे लंड को सकिंग करो। मैंने राजेश के लंड को सकिंग किया मै काफी देर तक उसके लंड को चुसती रही, जब मेरी इच्छा पूरी तरीके से भर गई तो राजेश ने मेरी चूत में अपने लंड को डाल दिया। मेरी चूत में राजेश के लंड के प्रवेश होते ही मुझे बड़ा अच्छा लगा मेरी चूत से गर्म पानी बाहर निकलने लगा। राजेश मुझे तेजी से धक्के मारने लगा मैं भी अपने दोनों पैरों को चौड़ा करने लगी और अपने मुंह से मादक आवाज निकालने लगी।

जब मैं अपने मुंह से आवाज निकालती तो राजेश भी पूरी तरीके से गर्म हो जाता और वह मुझे कहता तुम्हारे साथ आज सेक्स कर के मजा आ गया। राजेश ने मेरी चूत का भोसडा बना दिया। राजेश का वीर्य पतन हुआ तो उसके बाद वह मेरे साथ तीन बार और सेक्स किया। हम दोनों के बीच में 4 बार सेक्स हुआ लेकिन जब राजेश की असलियत मुझे पता चली तो वह मुझसे मिलने से डरने लगा। राजेश की शादी पहले ही हो चुकी थी लेकिन उसने मुझे कभी भी अपनी शादी के बारे में नहीं बताया था मुझे भी इस बात का बहुत सदमा लगा। राजेश ने मुझे कई बार समझाने की कोशिश की लेकिन मैंने राजेश से कहा तुमने मेरे साथ गलत किया और तुमने मेरा बहुत फायदा उठाया। राजेश कहने लगा देखो आकांक्षा मैं तुम्हारा साथ हमेशा देना चाहता हूं लेकिन इसका यह मतलब तो नहीं कि तुम मुझसे बात ही ना करो। राजेश और मेरे बीच में बात नहीं होती है मैं अब भी अकेली हूं और अकेले ही अपना जीवन यापन कर रही हूं।

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